एमपी में बुजुर्ग असुरक्षित:NCRB की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, सीनियर सिटीजन से रेप के मामले सबसे ज्यादा

पल्लवी वाघेला, भोपाल। एनसीआरबी 2024 की रिपोर्ट के अनुसार सीनियर सिटीजन के खिलाफ अपराधों में मध्यप्रदेश शीर्ष पर है। दुष्कर्म, धमकी, हत्या और धोखाधड़ी जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। हर दिन औसतन 16 बुजुर्ग किसी न किसी अपराध का शिकार बन रहे हैं। परिवार और समाज की संवेदनहीनता भी इन घटनाओं को बढ़ाने में अहम कारण बन रही है।
सीनियर सिटीजन से रेप के मामले सबसे ज्यादा
एनसीआरबी की साल 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक सीनियर सिटीजन से दुष्कर्म की सबसे अधिक घटनाएं मध्यप्रदेश में हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश से इस कैटेगरी में कुल 89 केस दर्ज हुए, इनमें सबसे अधिक 23 मामले मध्यप्रदेश के हैं। वहीं, सीनियर सिटीजन से अलग-अलग तरह के क्राइम में भी एमपी का देश में सर्वोच्च स्थान है। साल 2024 में सीनियर सिटीजन से संबंधित क्राइम के कुल 5,875 मामले दर्ज हुए, इनमें 6025 बुजुर्गों ने अपराध का सामना किया यानी हर दिन 16 बुजुर्ग किसी न किसी वारदात का शिकार बने।
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धमकी और हिंसा के मामले बढ़े
एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में बुजुर्गों के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले डराने-धमकाने के रहे हैं। पूरे साल में 399 दर्ज मामलों में 401 वरिष्ठ नागरिकों ने खुद को धमकियों का सामना किया। इनमें से ज्यादातर मामलों में अपराध करने वाले बुजुर्गों के परिचित या परिवार के लोग थे। वहीं, 148 वृद्धजन की हत्या और 394 बुजुर्गों को गंभीर चोट पहुंचाने के मामले भी प्रदेश में दर्ज हुए। यह मामले देश में सबसे अधिक हैं। कुल मामलों की बात करें तो साल 2024 में दर्ज 5,875 का आंकड़ा इसके पिछले साल 2023 में दर्ज 5,738 से अधिक है।
धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध भी चिंता का कारण
आर्थिक अपराधों में भी बुजुर्ग लगातार शिकार बन रहे हैं। अपराधियों ने बुजुर्गों को सड़क और घर दोनों जगह निशाना बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में धोखाधड़ी और फ्रॉड के 124 मामले दर्ज हुए। कई मामलों में अकेले रह रहे बुजुर्गों को झांसे में लेकर उनकी जीवनभर की पूंजी तक ठग ली गई। वहीं, 30 मामलों में सीनियर सिटीजन फर्जी दस्तावेज और जालसाजी के शिकार हुए।
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विशेषज्ञों की क्या कहना हैं ?
मंजिले एसोसिएशन फॉर एल्डरली पीपल्स की दीपा श्रीवास्तव ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए कानून और हेल्पलाइन मौजूद है और ऐसा भी नहीं है कि सरकार या पुलिस विभाग अपने स्तर पर सीनियर सिटीजन को सुरक्षा देने के लिए कुछ कर नहीं रही हैं। दरअसल, इन अपराधों को रोकने के लिए केवल कानून नहीं बल्कि समाज और परिवार की संवेदनशीलता की अधिक आवश्यकता है। हमारे सामने जो मामले आते हैं उनमें ज्यादातर में बुजुर्गों के अपराधी उनके अपने लोग होते हैं। इसी के साथ साइकोलॉजिस्ट दीप्ति सिंघल का कहना है कि बदलती जीवनशैली, अकेलापन, परिवारों का बिखराव और डिजिटल ठगी के बढ़ते तरीके बुजुर्गों को ज्यादा असुरक्षित बना रहे हैं। कई बुजुर्ग ऐसे हैं जो अपमान या परिवार की बदनामी के डर से शिकायत तक दर्ज नहीं कराते। ऐसे में वास्तविक संख्या और भी ज्यादा हो सकती है।












