नेशनल डेस्क। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग उठाई है। इस संबंध में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मरणोपरांत भारत रत्न देने का आग्रह किया है। राहुल गांधी ने यह पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया और कहा कि कांशीराम सामाजिक न्याय के महान योद्धा और बहुजन चेतना के मार्गदर्शक थे।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा कि यह मांग ऐसे समय में की जा रही है, जब देश कांशीराम की जयंती मना रहा है और उनके योगदान व विरासत को याद कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर कांशीराम के सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष को उचित सम्मान देना जरूरी है। गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में उम्मीद जताई कि सरकार इस मांग पर सकारात्मक विचार करेगी और कांशीराम के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देगी।
कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना कर देश में दलित और वंचित समुदायों की राजनीति को नई दिशा दी। उन्होंने समाज के हाशिए पर खड़े लोगों को संगठित कर उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों के लिए आवाज उठाने की ताकत दी। उनके नेतृत्व में बहुजन आंदोलन ने करोड़ों लोगों को अपने अधिकारों और हिस्सेदारी के प्रति जागरूक किया।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा कि कांशीराम ने भारतीय राजनीति का स्वरूप बदलने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बहुजनों और गरीब वर्गों में राजनीतिक चेतना जगाई और उन्हें यह एहसास कराया कि उनका वोट और उनकी आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। गांधी के अनुसार, कांशीराम के प्रयासों से कई ऐसे लोग भी राजनीति से जुड़े, जिन्होंने पहले कभी सार्वजनिक जीवन में आने के बारे में नहीं सोचा था।
कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में यह भी कहा कि कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा लंबे समय से की जाती रही है। उनका मानना है कि कांशीराम को यह सम्मान देना न सिर्फ एक महान नेता को श्रद्धांजलि होगी, बल्कि उस पूरे आंदोलन को भी सम्मानित करेगा जिसने बहुजनों को अधिकार, आत्मसम्मान और राजनीतिक भागीदारी का रास्ता दिखाया।
सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के अपने मिशन को आगे बढ़ाते हुए कांशीराम ने 1978 में बामसेफ (BAMCEF - Backward and Minority Communities Employees Federation) की स्थापना की। यह संगठन दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षित लोगों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से बनाया गया था। कांशीराम ने इसे धीरे-धीरे देशभर में विस्तार दिया और इसे एक वैचारिक आंदोलन का रूप दिया। इसके बाद 1984 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नींव रखी, जो एक राजनीतिक दल के रूप में उभरी। कांशीराम की ‘बहुजन’ की अवधारणा में दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय शामिल थे, जिनकी आबादी देश में लगभग 85 प्रतिशत मानी जाती है। इसी सामाजिक आधार पर बसपा ने राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चार बार सरकार भी बनाई। हालांकि वर्तमान समय में बसपा अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है, फिर भी कांशीराम की विचारधारा और राजनीतिक विरासत आज भी भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बनी हुई है।