Money Laundering Case : पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा सात दिन की ईडी हिरासत में

गुरुग्राम। पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को ईडी की हिरासत में भेजते हुए स्पेशल कोर्ट ने कहा कि संघीय एजेंसी को धन के स्रोत का पता लगाने के लिए उनसे पूछताछ करने की जरूरत है। सुनवाई के दौरान पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता अरोड़ा के वकील ने आरोप लगाया कि मंत्री के खिलाफ एक झूठा और निराधार मामला गढ़ा गया है और उनकी गिरफ्तारी से पहले जांच अधिकारी द्वारा कोई प्रथम दृष्टया सबूत एकत्र नहीं किया गया है।
ईडी की कार्रवाई से बढ़ी सियासी हलचल
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जीएसटी धोखाधड़ी और कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कारोबारी संजीव अरोड़ा को शनिवार शाम चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें सड़क मार्ग से गुरुग्राम लाया गया और विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया। ईडी ने इस दौरान उनकी कंपनी ‘हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ (HSRL) के गुरुग्राम स्थित दफ्तर पर भी छापेमारी की। कंपनी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।
157 करोड़ के कारोबार पर जांच का फोकस
ईडी के मुताबिक, जांच HSRL और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ चल रही है। एजेंसी का आरोप है कि वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी ने कई भारतीय और विदेशी संस्थाओं को करीब 157.12 करोड़ रुपए के मोबाइल फोन बेचे। ईडी का दावा है कि कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर होने के नाते संजीव अरोड़ा इन सभी कारोबारी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार थे।
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फर्जी कंपनियों के नेटवर्क का आरोप
जांच एजेंसी ने अदालत में कहा कि कंपनी ने कथित तौर पर मुखौटा कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया था। इन कंपनियों के जरिए फर्जी खरीद बिल बनाए गए और बाद में उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नकली बिक्री और निर्यात दिखाया गया। ईडी का आरोप है कि फर्जी बिलिंग, जालसाजी और शेल कंपनियों को भुगतान के जरिए धनशोधन किया गया तथा इसमें अरोड़ा की अहम भूमिका थी।
अदालत ने सात दिन की हिरासत दी
ईडी ने अदालत से अरोड़ा की 10 दिन की हिरासत मांगी थी, लेकिन विशेष अदालत ने उन्हें सात दिन के लिए एजेंसी की रिमांड पर भेज दिया। अदालत ने माना कि आरोप गंभीर हैं और मामले में धन के लेन-देन, आरोपियों की भूमिका तथा मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है। जस्टिस नरेंद्र सूरा ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ करने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
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102 करोड़ की आपराधिक आय का दावा
ईडी ने अदालत को बताया कि कथित फर्जी निर्यात और नकली खरीद के जरिए करीब 102.5 करोड़ रुपए की आपराधिक आय अर्जित की गई। एजेंसी का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी रिफंड हासिल किया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। जांच के दौरान एक दिहाड़ी मजदूर का बयान भी दर्ज किया गया, जिसे मोबाइल फोन सप्लाई करने वाली एक कंपनी का मालिक बताया गया। ईडी का दावा है कि ऐसी कंपनियां केवल अवैध धन को ठिकाने लगाने के लिए बनाई गई थीं।
बचाव पक्ष ने बताया राजनीति से प्रेरित मामला
अरोड़ा के वकीलों ने अदालत में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे उनके मुवक्किल की संलिप्तता साबित हो सके। उनका कहना था कि ईडी कथित अपराध और अरोड़ा के बीच सीधा संबंध नहीं दिखा पाई है। बाद में मीडिया से बातचीत में बचाव पक्ष ने पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित करार दिया। वहीं HSRL ने अपने बयान में कहा कि कंपनी द्वारा निर्यात किए गए हर मोबाइल फोन का सत्यापन स्वतंत्र वैधानिक एजेंसियों द्वारा किया गया था और किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई।
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विपक्ष ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने ईडी की कार्रवाई की आलोचना की। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने और उन्हें डराने के लिए कर रही है। विपक्ष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है, जबकि ईडी का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ रही है।












