सोहागपुर:पचमढ़ी-मढ़ई ईको सेंसिटिव जोन पर उठे सवाल, लोग कर रहे पुनर्मूल्यांकन की मांग

पचमढ़ी-मढ़ई ईको सेंसिटिव जोन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं जिसके कारण स्थानीय लोग इसके पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं।
पचमढ़ी-मढ़ई ईको सेंसिटिव जोन पर उठे सवाल, लोग कर रहे पुनर्मूल्यांकन की मांग

सोहागपुर। पचमढ़ी-मढ़ई क्षेत्र में प्रस्तावित ईको सेंसिटिव जोन को लेकर स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों की चिंता लगातार बढ़ रही है। जनसुनवाई के दौरान लोगों ने प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ईको सेंसिटिव जोन की सीमाओं का पुनर्मूल्यांकन किया जाए ताकि विकास कार्य और रोजगार प्रभावित न हों।

पर्यटन और व्यापार पर असर की आशंका

जनसुनवाई में दिए गए दावों, आपत्तियों और सुझावों में लोगों ने कहा कि मौजूदा सीमांकन के कारण उद्योग, रिसॉर्ट, होम-स्टे और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार में मुश्किलें आ रही हैं। पचमढ़ी के व्यवसायी गोपाल काबरा और पंकज जायसवाल सहित अन्य लोगों का कहना है कि पचमढ़ी पहले से ही रक्षा मंत्रालय की भूमि से घिरा हुआ है जिसके कारण विकास की संभावनाएं सीमित हैं। अब ईको सेंसिटिव जोन के दायरे के चलते कई प्रस्तावित परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर पड़ रहा है।

/img/116/1778417629251

मढ़ई क्षेत्र में भी बढ़ी चिंता

सोहागपुर के मढ़ई क्षेत्र में भी पर्यटन विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर असर पड़ने की बात सामने आई है। समाजसेवी कन्नू लाल अग्रवाल और कृष्ण कुमार पालीवाल ने कहा कि इसका सीधा असर व्यापार और रोजगार पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में शुरू की गई हेली सेवा भी हेलीपैड के निर्धारण में दिक्कतों के कारण बंद हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पर्यटन सुविधाओं का विस्तार हो तो इलाके में रोजगार और कारोबार को नई रफ्तार मिल सकती है।

ये भी पढ़ें: मध्यप्रदेश में 3 IPS अफसरों के तबादले! गृह विभाग ने जारी किए आदेश, कई जिलों में बदली जिम्मेदारियां

प्रशासन को मिले करीब 50 सुझाव और आपत्तियां

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक आशीष खोबरागड़े ने बताया कि प्रशासन को करीब 50 दावे, सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। वहीं एसडीएम प्रियंका भलावी के अनुसार, पिपरिया, मढ़ई, पचमढ़ी और आसपास के क्षेत्रों से लोगों ने अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराए हैं। जिला प्रशासन अब सभी सुझावों और दावों का परीक्षण कर शासन को रिपोर्ट भेजेगा। अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।

/img/116/1778417845200 

ये भी पढ़ें: कोटा मेडिकल कॉलेज: सीजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की बिगड़ी हालत, 10 महिलाओं की किडनी फेल

लोगों की प्रमुख मांगें

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने प्रशासन के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं-

  • ईको सेंसिटिव जोन की सीमा का पुनर्मूल्यांकन किया जाए
  • पर्यटन और छोटे उद्योगों को अनुमति दी जाए
  • होम-स्टे, रिसॉर्ट और स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा मिले
  • किसानों और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित न हो
  • विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जाए

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की मांग

जनसुनवाई में शामिल लोगों का कहना है कि वे पर्यावरण संरक्षण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन विकास कार्य पूरी तरह रुकने से स्थानीय युवाओं के रोजगार और व्यापार पर असर पड़ रहा है। लोगों ने शासन से ऐसी नीति बनाने की मांग की है जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ क्षेत्र का विकास भी जारी रह सके।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

Latest Posts