जल्दबाजी क्यों...?महिला आरक्षण पर प्रियंका का वार, सरकार की रणनीति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर जहां एक ओर समर्थन दिखा, वहीं दूसरी ओर इसके लागू करने की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने कई अहम सवाल उठाए। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार की मंशा, टाइमिंग और तैयारी पर गंभीर आपत्तियां जताईं।
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार इस बड़े विधेयक को जल्दबाजी में लागू करने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े बदलाव के लिए नए और सटीक आंकड़े जरूरी होते हैं, ताकि सभी वर्गों को सही प्रतिनिधित्व मिल सके।
परिसीमन और सीटों के विस्तार पर सवाल
प्रियंका ने संसद की सीटों के विस्तार के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि लोकसभा की सीटों को 50% तक बढ़ाने की बात कही जा रही है, लेकिन इस पर कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है। उनके अनुसार, विधेयक में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्टता की कमी है।
ओबीसी प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ ओबीसी वर्ग की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ उनके अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर नई जनगणना होती है, तो ओबीसी वर्ग की वास्तविक स्थिति सामने आएगी, जिससे सरकार असहज है।
पीएम मोदी और सरकार पर तंज
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार नई जनगणना से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन लागू कर सरकार ओबीसी वर्ग के हक को प्रभावित करना चाहती है।
उन्होंने असम में हुए परिसीमन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां सीमांकन को लेकर निष्पक्षता पर सवाल उठे थे। उनके मुताबिक, इसी तरह की प्रक्रिया को दोहराने की आशंका है।
अमित शाह पर कसा तंज
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर प्राचीन रणनीतिकार चाणक्य आज होते, तो मौजूदा हालात देखकर हैरान रह जाते।
33% आरक्षण अभी क्यों नहीं?
प्रियंका गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि जब लोकसभा में 543 सीटें पहले से मौजूद हैं, तो इन्हीं में 33% महिला आरक्षण क्यों लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है।
समर्थन, लेकिन शर्तों के साथ
प्रियंका गांधी के बयान से साफ है कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसके लागू करने के तरीके, समय और पारदर्शिता को लेकर चिंतित है। उनका कहना है कि यह मुद्दा महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा है, इसलिए इसे पूरी तैयारी और निष्पक्षता के साथ लागू किया जाना चाहिए।











