MP News :मप्र में 9 साल बाद प्रमोशन की तैयारी, विभागों से तीन दिन में मांगा रिकॉर्ड

भोपाल। राज्य सरकार ने विभागों के अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभाग एक बार अपना पदोन्नति संबंधी रिकॉर्ड चेक कर लें। अधिकारी यह तय कर लें कि सीनियरिटी लेवल में कौन, कहां किस स्तर पर है ताकि जब भी सरकार पदोन्नति के आदेश जारी करने का फैसला करे तो तत्काल विभाग वार पदोन्नति के आदेश जारी किए जा सकें। मालूम हो कि इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग जैन विभागों को पहले ही निर्देश दे चुके हैं। सभी अधिकारियों को लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के नियम 5 के आधार पर सूची तैयार करने के लिए कहा गया है।
अधिकारियों की सीनियरिटी लिस्ट बनेगी
निर्देश के अनुसार सभी विभाग वर्ष 2029 तक की स्थिति में अधिकारियों की सीनियरिटी सूची तैयार करेंगे। इसके बाद पदोन्नति आदेश जारी करते समय इन्हीं अधिकारियों को प्रमोशन देने का काम किया जाएगा। इसमें वर्तमान में कितने कर्मचारियों, अधिकारियों की पदोन्नति रुकी हुई है और कितनों की होनी है, इसमें कितने पदों पर एसटी-एससी के कर्मचारी, अधिकारी वर्तमान में पदस्थ हैं।
दस मिनट के अंदर बैठक समाप्त
पदोन्नति को लेकर हुई बैठक में शामिल अधिकारियों का कहना है कि वे खुद बहुत ज्यादा इस बात को समझ नहीं पाए हैं। जीएडी के निर्देश के आधार पर 2029 तक की वरिष्ठता की सूची अभी हम तैयार करा रहे हैं, जिसे जीएडी को सौंप देंगे। अफसरों ने यह साफ किया कि 2025 के नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा, जो नियम तय किए गए हैं, उसी आधार पर सूची तैयार कराई जा रही है।
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नौ साल से अटके दो लाख अधिकारी कर्मचारी के प्रमोशन
प्रदेश में दो लाख कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रमोशन नौ साल से अटके हैं। इसके चलते जल संसाधन, पीएचई, नर्मदा घाटी विकास विभाग, नगरीय विकास और आवास विभाग समेत कई बड़े विभागों में अधिकारी प्रभार के पदों पर काम कर रहे हैं।
पीएचई विभाग से समझिए अभी क्या है स्थिति
उदाहरण के तौर पर पीएचई विभाग में तो प्रमोशन न होने के कारण स्थिति यह है कि 127 कार्यपालन यंत्री के पद हैं जिसमें से 15 ही काम कर रहे हैं। शेष पदों पर प्रभार के सहारे काम चलाया जा रहा है। पीएचई विभाग की ही तरह जल संसाधन और लोक निर्माण विभाग में भी स्थिति है। यहां भी अधीक्षण यंत्री स्तर के अफसरों को प्रभारी ईएनसी बनाकर रखा गया है।
'SC-ST को फायदा पहुंचाने का काम'
सरकार SC-ST वर्ग को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही है। इसीलिए 2002 में लागू नियम को 2025 में भी लाया गया है। सरकार ने 2002 में जो पदोन्नति आरक्षित वर्ग को दी है, वह तय लिमिट से ज्यादा है। अब सरकार पहले आरक्षित वर्ग की पदोन्नति रोककर अनारक्षित वर्ग को पदोन्नति दे, इसके बाद ही इस विषम स्थिति को दूर किया जा सकता है।
डॉ. केएस तोमर, अध्यक्ष, सामान्य पिछड़ा वर्ग अधिकारी कर्मचारी संगठन
A-B और C फॉर्मूला होगा लागू
इसके लिए A, B और C फॉर्मूला लागू किया गया है। इस फॉर्मूले में SC-ST को 36 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जाएगा। शेष पद सामान्य केटेगरी से भरे जाएंगे। दरअसल एक साल पहले जारी पदोन्नति नियमों के मामले में हाईकोर्ट से अभी तक कुछ फैसला नहीं आ पाने के बाद सरकार कुछ बीच का रास्ता निकालने में लगी है।
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प्रमोशन का फॉर्मूला
1. खाली पदों को एसी-एसटी 16-20 प्रतिशत और अनारक्षित हिस्सों में बांटा जाएगा।
2. पहले SC-ST के पद भर जाएंगे।
लिस्ट का भी क्लासीफिकेशन
क्लास 1 अधिकारी की लिस्ट सीनियरिटी और मैरिट के आधार पर बनेगी।
क्लास-2 की लिस्ट सीनियरिटी के आधार पर बनेगी।
(नोट-प्रमोशन के लिए एसीआर अच्छी होना जरूरी है।)
नए सिरे से होगी सुनवाई
मप्र सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण को लेकर मप्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मप्र हाईकोर्ट में नए सिरे से सुनवाई होगी। इन मामलों पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में 17 फरवरी 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। चूंकि चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा प्रमोट होकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं और जस्टिस विनय सराफ का ट्रांसफर इन्दौर खण्डपीठ में हो चुका है, इसलिए ये मामले अब जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध हुए हैं, जिस पर 15 जुलाई को दोपहर ढाई बजे से सुनवाई होगी।
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