ई-रिक्शा को मिली छूट पर हाईकोर्ट सख्त:सरकार से कहा- जरूरत हो तो फैसला वापस लेने पर करें विचार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ई-रिक्शा को दी गई सरकारी छूट को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अंतिम समय दिया है। साथ ही यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो तो सरकार ई-रिक्शा को दी गई छूट वापस लेने पर भी विचार कर सकती है।
याचिका में क्या उठाए गए सवाल
याचिका में कहा गया है कि ई-रिक्शा के संचालन को लेकर पर्याप्त नियम लागू नहीं हैं। आरोप लगाया गया है कि कई जगहों पर इनके लिए न तो रूट तय हैं न निर्धारित स्टॉपेज और न ही पार्किंग की व्यवस्था है। इसके अलावा परमिट की अनिवार्यता नहीं होने से इनके संचालन पर प्रभावी नियंत्रण भी नहीं रह गया है जिससे शहरों की यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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2018 की अधिसूचना पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में वर्ष 2018 की उस अधिसूचना को चुनौती दी है जिसके तहत ई-रिक्शा और बैटरी से चलने वाले वाहनों को परमिट लेने की अनिवार्यता से छूट दी गई थी। उनका कहना है कि इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में ई-रिक्शा बिना किसी प्रभावी नियमन के सड़कों पर चल रहे हैं जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ रही है।
कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने की। प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने केंद्र सरकार सहित संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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अगली सुनवाई में साफ होगी स्थिति
हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है लेकिन यह स्पष्ट किया है कि यदि परिस्थितियां इसकी मांग करती हैं तो सरकार ई-रिक्शा को दी गई छूट पर दोबारा विचार कर सकती है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां सरकार और अन्य पक्ष अपना पक्ष अदालत के सामने रखेंगे।












