Naresh Bhagoria
5 Feb 2026
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Garima Vishwakarma
5 Feb 2026
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विजय एस. गौर-भोपाल। खराब क्वालिटी के बीज देने पर साल 2019 में मध्यप्रदेश के साथ ही छत्तीसगढ़ और बिहार में ब्लैक लिस्टेड डीसीएम श्रीराम बायोसीड कंपनी के बीजों की खरीदी की तैयारी मप्र में फिर शुरू हो गई है। कंपनी को उपकृत करने की इतनी जल्दबाजी है कि राष्ट्रीय बीज निगम ने 5 साल के प्रतिबंध अवधि पूरी होने से पहले ही प्रदेश के कृषि विभाग को खरीदी के लिए बीजों की उपलब्धता का पत्र जारी कर दिया है।
दरअसल राष्ट्रीय बीज निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक ने आयुक्त सह संचालक किसान कल्याण कृषि विकास के साथ ही मप्र के सभी जिलों के उपसंचालक किसान कल्याण कृषि विकास को बीजों की उपलब्धता का पत्र जारी किया है, ताकि सरकारी खरीद हो सके। इसके बाद संचालक किसान कल्याण और कृषि विकास द्वारा 24 मई 2024 को पत्र जारी किया है। इस मामले में डीसीएम श्रीराम बायोसीड कंपनी से बात करने की कोशिश की पर संपर्क नहीं हो सकता। पीपुल्स समाचार के पास निर्देश की कॉपी है।
दरअसल हैदराबाद की डीसीएम श्रीराम बायोसीड कंपनी को 2019 में ब्लैकलिस्ट करके शासकीय खरीदी पर रोक लगा दी गई थी। तब भी इस कंपनी के पक्ष में राष्ट्रीय बीज निगम ने पत्र जारी कर दिया था, इसके विरोध में किसानों ने राजभवन मार्च करके ज्ञापन सौंपा था। हद तो यह कि 2019 में ही राष्ट्रीय बीज निगम ने तब घेरे में आए बीजों को अपनी किस्म बताया था, लेकिन बाद में जांच मे सामने आया था कि बीज किस्में प्रतिबंधित कंपनी की थीं। हालांकि तब जिलों तक प्रतिबंध की सूचना नहीं पहुंचने दी गई थी, जिसके नतीजे में 18 करोड़ रुपए का बीज शासकीय स्तर पर खरीद लिया गया था। इस पर जांच के दौरान तत्कालीन प्रमुख सचिव कृषि अजीत केसरी व संचालक कृषि प्रीति मैथिल नायक को किसानों ने गड़बड़ी के तथ्य दिए थे कि 21 जून वर्ष 2019 को जारी प्रतिबंधात्मक पत्र क्रमांक 3352 किसी भी जिले के उपसंचालक कृषि तक पहुंचा ही नहीं।
ब्लैकलिस्ट कंपनी को बहाल करने की प्रक्रिया: सूत्रों के अनुसार जिस कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया जाता है। उसे सरकार के सामने अपील करनी पड़ती है। अगर सरकार प्रतिबंध हटाती है तो एक आर्डर जारी होता है।
प्रतिबंध के बावजूद ब्लैक लिस्टेड कंपनी के पक्ष में राष्ट्रीय बीज निगम से पत्र जारी होने के मामले की जांच कराएंगे । किसानों के हित से खिलवाड़ नहीं होने देंगे, जो किसानों के हित में होगा, वही होगा। -ऐदल सिंह कंसाना, मंत्री, कृषि एवं किसान कल्याण