नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण के दूसरे एपिसोड में देशभर से आए छात्रों से संवाद किया। इस दौरान पीएम मोदी अलग-अलग लोकेशन पर पहुंचे और बच्चों से पढ़ाई, परीक्षा तनाव, टेक्नोलॉजी, लीडरशिप और जीवन कौशल जैसे विषयों पर खुलकर बातचीत की। पीएम ने छात्रों को सीखने की जिज्ञासा बनाए रखने, निडर बनने और टेक्नोलॉजी को साधन के रूप में अपनाने की सलाह दी।
दूसरे एपिसोड में पीएम मोदी तमिलनाडु के कोयंबटूर से संवाद की शुरुआत करते हुए छत्तीसगढ़ पहुंचे। इसके बाद वे असम के गुवाहाटी स्थित अष्टलक्ष्मी मंदिर परिसर पहुंचे, जहां छात्रों से सीधी बातचीत की। इस मल्टी-लोकेशन फॉर्मेट ने परीक्षा पे चर्चा को पहले से ज्यादा जीवंत बना दिया।
छात्रों से संवाद के दौरान पीएम मोदी ने टेक्नोलॉजी को लेकर अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि, टेक्नोलॉजी से डरने या उसके पीछे भागने की जरूरत नहीं है, लेकिन कभी भी टेक्नोलॉजी का गुलाम नहीं बनना चाहिए।
पीएम ने कहा कि, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अपनी क्षमता बढ़ाने और बेहतर सीखने के लिए किया जाना चाहिए, न कि उस पर पूरी तरह निर्भर होकर।
परीक्षा की तैयारी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को स्पष्ट संदेश दिया कि केवल किताबें पढ़ना ही सफलता की गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि, पढ़ाई के साथ-साथ लिखकर अभ्यास करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे विषय की समझ मजबूत होती है। पेपर सॉल्व करने की नियमित आदत डालने से परीक्षा का डर धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। पीएम मोदी ने बताया कि लगातार अभ्यास करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और छात्र परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि एक सामान्य प्रक्रिया की तरह लेने लगते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से अपील की कि वे पढ़ाई में कमजोर सहपाठियों की मदद के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि ऐसे क्लासमेट्स से दोस्ती करनी चाहिए और उन्हें विषय समझाने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि जब हम दूसरों को पढ़ाते हैं तो अपनी समझ भी और मजबूत होती है। पीएम मोदी के अनुसार, यह आदत केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि छात्रों में संवेदनशीलता, सहयोग और टीमवर्क की भावना भी विकसित करती है, जो जीवन में आगे चलकर बहुत काम आती है।
परीक्षा के तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को एक सरल और प्रभावी तरीका बताया। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी पुरानी परीक्षाओं को याद करें… उस समय भी मन में तनाव था, लेकिन परीक्षा खत्म होते ही सब कुछ सामान्य हो गया था। पीएम मोदी ने समझाया कि तनाव होना स्वाभाविक है, लेकिन नियमित अभ्यास से यह डर धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। लिखने की आदत और पेपर सॉल्व करने की लगातार प्रैक्टिस तनाव को कम करती है। उनके अनुसार, सही और निरंतर तैयारी ही परीक्षा तनाव का सबसे बड़ा इलाज है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को हमेशा सीखने की सोच बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि, जब भी घूमने जाएं, तो सबसे पहले अपनी तहसील को समझें, फिर जिले, राज्य और देश को जानने की कोशिश करें। हर जगह चीजों को एक स्टूडेंट की नजर से देखें, ताकि सीखने की प्रक्रिया कभी न रुके। पीएम मोदी ने समझाया कि इसी सोच से व्यक्ति का नजरिया व्यापक बनता है और ज्ञान लगातार बढ़ता रहता है।
लीडरशिप को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि सबसे पहले निडर बनना जरूरी है। जब कोई व्यक्ति मन में यह ठान लेता है कि चाहे कोई और करे या न करे, मैं यह काम जरूर करूंगा, तभी नेतृत्व की शुरुआत होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई सड़क पर पड़ा कचरा उठा लेता है, तो उसे देखकर चार लोग और भी वैसा ही करने लगते हैं। यही असली लीडरशिप है, जो बिना कहे दूसरों को सही दिशा दिखाती है।
‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें एडिशन का पहला एपिसोड 6 फरवरी को जारी किया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर छात्रों से सीधा संवाद किया था। इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने छात्रों को विदेशी चीजों के बजाय स्वदेशी को अपनाने की सलाह दी और अगले 25 वर्षों में विकसित भारत बनाने का सपना दिखाया। उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखने, पढ़ाई और जीवन में संतुलन जरूरी होने पर भी जोर दिया, ताकि छात्र न सिर्फ परीक्षा में सफल हों, बल्कि भविष्य के लिए भी मजबूत आधार तैयार कर सकें।
पहले एपिसोड में पीएम मोदी ने छात्रों को सलाह दी की-
विकसित भारत को अपना सपना बनाएं।
खुद पर भरोसा रखकर डर भगाएं।
भारतीय कहानियों पर गेम बनाएं।
मार्क्स-मार्क्स की बीमारी से बचें।
स्किल और मार्क्स में संतुलन रखें।
‘परीक्षा पे चर्चा’ की शुरुआत साल 2018 में हुई थी। इसका मकसद बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों का तनाव कम करना और परीक्षा को उत्सव की तरह देखने का संदेश देना है।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पहल अब एक जन आंदोलन बन चुकी है, जो छात्रों को आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा देने के लिए प्रेरित करती है।
‘परीक्षा पे चर्चा’ का 8वां एडिशन फरवरी 2025 में आयोजित किया गया था, जिसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर नया इतिहास रच दिया। इस कार्यक्रम में 245 से ज्यादा देशों के छात्रों, 153 देशों के शिक्षकों और 149 देशों के अभिभावकों ने हिस्सा लिया था। साल 2018 में जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब केवल 22 हजार प्रतिभागी जुड़े थे, लेकिन 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3.56 करोड़ रजिस्ट्रेशन तक पहुंच गई, जो इस पहल की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव को दर्शाती है।