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महासंग्राम!विपक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रत्साव ला सकता है, 50 सांसदों का समर्थन जरूरी

इस मुद्दे पर कांग्रेस महिला सांसदों द्वारा लोकसभा को लेटर लिखा गया है। पत्र में कहा गया है कि यह पत्र गहरे दुख और संवैधानिक कर्तव्य की भावना के साथ लिखा जा रहा है।
विपक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रत्साव ला सकता है, 50 सांसदों का समर्थन जरूरी
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर सकता है। न्यूज एजेंसी IANS ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। नियमों के अनुसार, इसके लिए सदन में कम से कम 14 दिन पहले लिखित सूचना देनी होती है।

    भारी हंगामे के बीच शुरू हुई कार्रवाई

    इससे पहले बजट सत्र के नौवें दिन, यानी सोमवार को संसद की कार्यवाही हंगामे के साथ शुरू हुई। विपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर देने की मांग पर अड़ा रहा। इस पर लोकसभा स्पीकर ने कहा कि वे प्रश्नकाल के बाद अपनी बात रख सकते हैं। हालांकि, विपक्षी नेता इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुए और सदन में शोर-शराबा जारी रखा।

    ओम बिरला से नाराज चल रही कांग्रेस

    उल्लेखनीय है कि विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, लोकसभा अध्यक्ष के रवैये से असंतुष्ट है। कांग्रेस का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए उनके नेता को पूरा भाषण देने का अवसर नहीं दिया। दूसरी ओर, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कुछ पुस्तकों का संदर्भ देते हुए इंदिरा गांधी समेत कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों पर तीखा हमला बोला था।

    विपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा- टैगोर

    टैगोर ने कहा कि सदन की अध्यक्षता कर रहे चेयर निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय एकतरफा रुख अपना रहे हैं और सरकार के साथ मिलकर विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। उनका आरोप था कि स्पीकर सरकार के हर कदम में सहयोग कर रहे हैं, जिससे विपक्ष को गहरी पीड़ा हुई है। टैगोर ने जोर देकर कहा कि यह पद मूल रूप से तटस्थ होता है, जहां सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष की बात भी समान रूप से सुनी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चेयर का दायित्व केवल विपक्ष को बार-बार टोकना या उन्हें बोलने से रोकना नहीं है, लेकिन इसके उलट विपक्षी नेताओं के माइक बंद कर दिए जाते हैं

    इधर कांग्रेस महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजा लेटर

    इस मुद्दे पर कांग्रेस महिला सांसदों द्वारा लोकसभा को लेटर लिखा गया है। पत्र में कहा गया है कि यह पत्र गहरे दुख और संवैधानिक कर्तव्य की भावना के साथ लिखा जा रहा है। इसमें अफसोस जताया गया है कि लोकसभा स्पीकर होने के नाते, जो इस गरिमामय सदन के संवैधानिक रक्षक भी हैं, आप ऐसी स्थिति में आ गए हैं।

    जहां सत्ताधारी दल द्वारा विपक्ष की महिला सांसदों विशेष रूप से इंडियन नेशनल कांग्रेस की महिला सांसदों के खिलाफ लगाए जा रहे झूठे, निराधार और मानहानि से जुड़े आरोपों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताई गई है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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