नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के असर को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को राज्यों की तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक करेंगे। इसमें ईरान द्वारा महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखने और ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर को लेकर चर्चा की जाएगी। बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में देश की ऊर्जा और आर्थिक स्थिरता प्रभावित न हो। सरकार चाहती है कि सभी राज्य मिलकर संभावित चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट रणनीति तैयार करें।
जिन राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, वहां आचार संहिता लागू होने के कारण उनके मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ अलग से बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी कैबिनेट सचिवालय को दी गई है। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में भी मौजूदा परिस्थितियों पर चर्चा की गई थी। प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा था कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है, इसलिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों के समन्वय का उदाहरण देते हुए उसी ‘टीम इंडिया’ भावना को फिर मजबूत करने की जरूरत बताई।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल तेल और ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार भारत ने करीब 60 दिनों की कच्चे तेल की जरूरत के लिए अग्रिम आयात व्यवस्था कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह नियंत्रण में है। तेल विपणन कंपनियों ने भी भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सामान्य बनी रहेगी। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और घबराहट में अनावश्यक खरीदारी से बचें, ताकि बाजार में संतुलन बना रहे।