भोपाल। मध्यप्रदेश के पेट्रोल पंपों में सूखा होने का एकमात्र कारण यह है कि पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को 8 से 10 दिन के लिए दी जाने वाली क्रेडिट (उधारी पर पेट्रोल) अचानक बंद कर दी है। दूसरी ओर पंपों को सरकारी कार्यालयों और अफसरों को प्रदाय किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल के बदले पेमेंट दो से तीन महीने में होने के चलते पंपों पर सूखा हो रहा है।
दरअसल पेट्रोल पंप संचालकों को डिपो से टैंकर भरवाने पर तत्काल भुगतान नहीं करना होता था, बल्कि 8 से 10 दिन बाद तक भुगतान कर सकते हैं। इसके लिए पेट्रोलियम कंपनियों के डिपो से पंप संचालकों को मोहलत मिल जाती थी, जिसमें ब्याज भी नहीं देना होता था। इस व्यवस्था को अचानक डिपो से करीब हफ्तेभर से बंद कर दिया गया है। इसके लिए कंपनियों ने कोई कारण नहीं बताया है, लेकिन पंप संचालकों की क्रेडिट बंद कर दी है।
पंप संचालक क्रेडिट पर पेट्रोल डीजल लेने के बाद नगद के साथ ही उधारी पर भी विक्रय करते हैं। खासकर सरकारी, अर्द्ध सरकारी और बडेÞ-बडेÞ व्यापारिक संस्थान का खाता चलता है। ऐसे में पंपों से इनके वाहनो को तत्काल भुगतान किए बगैर र्इंधन आपूर्ति होती रहती है। इसके बदले में सरकारी विभागों से दो से तीन महीने के बाद जाकर भुगतान होता है, जबकि व्यावसायिक संस्थान महीने के अंत में भुगतान करते हैं। ऐसे में पेट्रोल पंप संचालकों का काम डिपो से मिलने वाली क्रेडिट पर निर्भर करता है, जोकि बंद हो चुकी है।
इस समस्या को लेकर पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर और मुख्यसचिव को सौंपे ज्ञापन में स्थिति स्पष्ट की है। इसमें बताया गया है कि क्रेडिट बंद करने का कोई कारण नहीं बताया जा रहा है, लेकिन पेट्रोल भी नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में पंपों पर पेट्रोल खत्म होने का बोर्ड लगाना पड़ रहा है, जिससे आम जनता में घबराहट और अफवाहें फैल रही हैं।
पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति के मुद्दे पर गुरुवार को मुख्य सचिव के साथ जिला अधिकारियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग में डिपो से मिलने वाली क्रेडिट के अचानक बंद करने का मुद्दा उठा। इसमें बताया गया कि पेट्रोल पंपों पर स्टाक नहीं होने का बड़ा कारण है। इस पर मुख्य सचिव ने आश्वस्त किया कि पेट्रोलियम कंपनियों के साथ ही केंद्रीय मंत्रालय को अवगत कराने के साथ ही समाधान निकाला जाएगा।
बिना किसी कारण पेट्रोलियम कंपनियों ने हफ्ते-दस दिन की क्रेडिट खत्म कर दी है। इससे पंपों पर पेट्रोल की आपूर्ति में बाधा हो रही है। दूसरी ओर, सरकारी सप्लाई सहित दूसरी उधारी का पैसा महीनों बाद आने से पंपों को बंद करने के हालात बन गए हैं।
अजय सिंह बिष्ट, अध्यक्ष, पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन
क्रेडिट खत्म करने से पेट्रोल पंपों में आपूर्ति कम होने या नहीं होने के बारे में चीफ सेक्रेटरी की वीसी में अवगत कराया गया है। इसके बाद अब राज्य की ओर से केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय या पेट्रोलियम कंपनियों से बात होने के बाद समाधान निकलने की उम्मीद है।
सीबी जादौन, जिला आपूर्ति अधिकारी, भोपाल