नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण अब अपने अहम दौर में पहुंच चुका है और आज इसका 10वां दिन है। इस बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालातों को लेकर देश की राजनीति भी तेज हो गई है। इसके लिए मोदी आज राज्यसभा में दोपहर 2 बजे इस मुद्दे पर विस्तृत बयान देंगे। इससे पहले सोमवार को उन्होंने लोकसभा में करीब 25 मिनट का संबोधन दिया था, जिसमें वैश्विक हालातों और भारत पर उनके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई।
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है और इसके परिणाम लंबे समय तक देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में देश को एकजुट रहकर स्थिति का सामना करना होगा। प्रधानमंत्री ने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने एकजुटता के दम पर पहले भी बड़ी चुनौतियों को पार किया है और इस बार भी वही भावना जरूरी है।
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प्रधानमंत्री ने साफ किया कि सरकार की प्राथमिकता देश में तेल और गैस की आपूर्ति को बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि भारत अब 27 की बजाय 41 देशों से तेल आयात कर रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस मुद्दे पर विपक्ष को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है, बल्कि समस्या सिर्फ विपक्ष के नेता की है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री ने संसद में सभी दलों से एकजुटता की अपील की है, लेकिन कांग्रेस हर मुद्दे पर राजनीति कर रही है। और वे इस समय में एकजुट होने से पीछे हट रही है।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने भारतीयों की सुरक्षा और ईंधन आपूर्ति दोनों पर स्पष्ट बात रखी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संघर्ष जल्द से जल्द खत्म होगा और स्थिति सामान्य हो जाएगी।
वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने समय रहते सही कूटनीतिक कदम नहीं उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने हमेशा राष्ट्रीय संकट के समय सरकार का साथ दिया है, लेकिन उनकी सलाह को नजरअंदाज किया गया।
इसी कड़ी में आरजेडी सांसद मनोज झा ने भी सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कूटनीति में समय का बहुत महत्व होता है और सरकार ने विपक्ष को कोसने में ज्यादा वक्त गंवा दिया। उनके मुताबिक, कई बार राजनयिक चुप्पी भी भारी पड़ जाती है।