PU Special :मप्र में पीएम आवास के तहत 10 लाख घर देने का लक्ष्य, लेकिन दो साल में 1.10 लाख तक ही पहुंची योजना

मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत पांच साल में 10 लाख आवासहीनों को घर देने का लक्ष्य है, लेकिन जमीन और स्थायी पट्टे की कमी से योजना की रफ्तार धीमी है। दो साल में करीब 1.10 लाख हितग्राही ही विभिन्न चरणों तक पहुंचे हैं। बड़े शहरों में भूखंड नहीं होने से हजारों परिवारों के आवेदन निरस्त होने की समस्या सामने आई है।
मप्र में पीएम आवास के तहत 10 लाख घर देने का लक्ष्य, लेकिन दो साल में 1.10 लाख तक ही पहुंची योजना

अशोक गौतम, भोपाल। प्रदेश में शहरी आवासहीनों को अपना घर देने की महत्वाकांक्षी योजना जमीन के अभाव में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत पांच साल में दस लाख आवासहीनों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है, लेकिन दो साल में अब तक करीब 1.10 लाख हितग्राही ही विभिन्न चरणों तक पहुंच सके हैं। इनमें किसी की पहली किस्त जारी हुई है, तो किसी को सब्सिडी के लिए सूचीबद्ध किया गया है अथवा बैंक को राशि जारी करने की मंजूरी मिली है।

सबसे बड़ी बाधा खुद की जमीन नहीं

योजना की राह में सबसे बड़ी बाधा खुद की जमीन का नहीं होना है। इसका असर भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। इन शहरों में बड़ी संख्या में परिवार झुग्गियों में रहते हैं, लेकिन उनके पास आवास निर्माण के लिए जमीन का स्थायी पट्टा नहीं है। इसके उलट मैहर, सीहोर, बैरसिया, कटनी और नागदा जैसे छोटे शहरों में बीएलसी (लाभार्थी आधारित निर्माण) घटक के तहत प्रगति बेहतर बताई जा रही है। यहां कई हितग्राहियों के पास अपना भूखंड उपलब्ध है, जिससे मकान निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ पा रही है।

पांच लाख आवेदन आए पर जमीन नहीं तो बड़ी संख्या में निरस्त

सूत्रों के अनुसार, आवास के लिए पांच लाख से अधिक आवेदन आए हैं, लेकिन अपने नाम पर भूखंड नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त हुए हैं। अब तक बीएलसी घटक में करीब 77 हजार आवास स्वीकृत किए जाने की जानकारी है। शेष लक्ष्य एएचपी (साझेदारी में किफायती आवास) 12 हजार आवास और आईएसएस (ब्याज सब्सिडी योजना) 11 हजार से अधिक आवास जैसे घटकों से पूरा किया गया है। ऐसे में दस लाख आवास का लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल आवेदन और स्वीकृति पर्याप्त नहीं होगी। खासकर बड़े शहरों में पात्र परिवारों के लिए जमीन और वैध पट्टे की व्यवस्था करना जरूरी होगा। अन्यथा मकान का सपना देखने वाले हजारों परिवार योजना के लाभ से बाहर रह सकते हैं।

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तीनों स्कीमों पर एक नजर

AHP (अफोर्डवल हाउसिंग इन पार्टनरशिप) स्कीम

  • शहरी क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लोगों को कम कीमत पर पक्का घर उपलब्ध कराना।
  • यदि हितग्राही के पास जमीन नहीं है, तो सरकार निजी या सार्वजनिक भागीदारी में बने किफायती फ्लैट्स आवंटित करती है।

BLC (बेनीफिशरी लीड कंसट्रक्शन ) शहरी हाउसिंग स्कीम

  • यदि अपनी जमीन है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लूएस) से आते हैं, तो सरकार घर बनाने के लिए 2.5 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता देती है।
  • कुछ राज्य सरकारें इसमें अपनी तरफ से अतिरिक्त अनुदान भी जोड़ती हैं। 

ISS (इंट्रेस्ट हाउसिंग स्कीम)

  • शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), निम्न आय वर्ग (एलआईजी) और मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के परिवारों को घर खरीदने या बनाने के लिए होम लोन पर ब्याज सब्सिडी देना।
  • इस स्कीम के तहत होम लोन पर 1.80 लाख रुपए तक की ब्याज सब्सिडी मिलती है।

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मेरे पास जमीन का पट्टा नहीं इसलिए आवेदन रद्द

भोपाल के जाटखेड़ी क्षेत्र में रहने वाले पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि-मेरे पर झुग्गी है, पीएम शहरी आवास के लिए आवेदन किया था। जमीन का पट्टा मेरे नाम से नहीं होने के कारण मेरा आवेदन निरस्त कर दिया गया। इसकी सूचना भी मुझे भेज दी गई है। एएचपी स्कीम के तरह मकान लेने के लिए मेरी सामर्थ नहीं है। 

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By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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