PU Special : नेत्रहीन दिव्यांग विद्यार्थी अब लैपटॉप पर टॉकिंग और स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर से खुद तैयार करेंगे प्रोजेक्ट, जबलपुर एक्सीलेंस कॉलेज में पहला प्रयोग

जबलपुर के पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस ने हेल्प द ब्लाइंड फाउंडेशन ट्रस्ट, चेन्नई के साथ एमओयू के तहत 25 दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को टॉकिंग और स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर से लैस लैपटॉप दिए हैं। इस पहल से विद्यार्थी स्वयं असाइनमेंट, सीसीई और प्रोजेक्ट तैयार कर सकेंगे। इसका उद्देश्य उन्हें आईटी कौशल सिखाकर आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
 नेत्रहीन दिव्यांग विद्यार्थी अब लैपटॉप पर टॉकिंग और स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर से खुद तैयार करेंगे प्रोजेक्ट, जबलपुर एक्सीलेंस कॉलेज में पहला प्रयोग
जबलपुर। लैपटॉप पर काम करता हुआ दिव्यांग छात्र अनुज कुमार साहू।

हर्षित चौरसिया, जबलपुर। जब आंखों में रोशनी न हो, तो अक्सर अपनी पढ़ाई और असाइनमेंट पूरे करने के लिए दूसरों की उंगलियों और वक्त का मोहताज होना पड़ता था। लेकिन अब यह बेबसी गुजरे जमाने की बात है यह कहना है पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के नेत्रहीन दिव्यांग छात्र अनुज कुमार साहू का। अनुज ने बताया कि अब बिना किसी की मदद से अपना प्रोजेक्ट या सीसीई (Continuous and Comprehensive Evaluation) लिखने के लिए किसी साथी के सामने हाथ नहीं जोड़ने पड़ेंगे, मेरी उंगलियां खुद कीबोर्ड पर दौड़ेंगी और मैं अपना काम खुद करूंगा।

दृष्टिबाधित छात्रों को आईटी में निपुण बना रहे

नेत्रहीन दिव्यांग छात्रों के लिए यह पहल पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस व हेल्प द ब्लाइंड फाउंडेशन ट्रस्ट, चेन्नई ने एमओयू के तहत की है। इस पहल के तहत 25 दिव्यांग विद्यार्थियों काे दिए हैं। दिव्यांगों के लिए विजुअली इम्पेयर्ड (नेत्रहीन) विद्यार्थियों को टॉकिंग और स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर से लैस लैपटॉप भी दे दिए गए हैं। पहल के समन्वयक डॉ. अरुण शुक्ला ने बताया कि हमारे स्किल डेवलपमेंट रिसोर्स सेंटर का मूल उद्देश्य इन विद्यार्थियों को सिर्फ डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि रोजगारपरक कौशल देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस केंद्र में दृष्टिबाधित छात्रों को आईटी और व्यावहारिक कौशलों में निपुण बनाया जा रहा है ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बनकर रोजगार हासिल कर सकें।

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रोल मॉडल साबित होगी पहल

पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने बताया कि मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में संभवत: यह पहला ऐसा संस्थान है, जिसने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को खुद तकनीक के जरिए सीसीई और प्रोजेक्ट तैयार करने में सक्षम बनाया है। यह पहल प्रदेश के अन्य कॉलेजों के लिए भी एक रोल मॉडल साबित होगी।

स्किल डेवलपमेंट के लिए किया एमओयू

हेल्प द ब्लाइंड फाउंडेशन ट्रस्ट, चेन्नई के ट्रस्टी राधाकृष्णन ने कहा कि  स्किल डेवलपमेंट रिसोर्स सेंटर का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल प्रदान कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। दिव्यांग विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए कॉलेज के साथ एमओयू किया गया है। इसी के तहत 25 लैपटॉप दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रदान किए गए हैं।

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Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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