पीएम की अपील का असर:मध्यप्रदेश में अब कैबिनेट बैठक होगी वर्चुअल, बदलेगा प्रशासन का तरीका, समय और ईंधन दोनों की बचत!

मध्यप्रदेश। राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 20 मई को होने वाली कैबिनेट बैठक अब भौतिक रूप से नहीं बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी बैठकों में ईंधन की खपत को कम करना, अनावश्यक यात्रा से बचना और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने अपने कारकेड में भी वाहनों की संख्या कम करने जैसे कदम उठाए हैं। साथ ही मंत्रियों और अधिकारियों को भी संसाधनों के समझदारी से उपयोग की सलाह दी गई है।
डिजिटल शासन की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश सरकार का कदम
मध्यप्रदेश सरकार लगातार प्रशासनिक सुधारों की दिशा में नई पहल कर रही है। इसी क्रम में कैबिनेट बैठक को वर्चुअल मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम केवल तकनीकी बदलाव नहीं है बल्कि शासन प्रणाली को अधिक स्मार्ट और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की कोशिश भी है। सरकार चाहती है कि बड़े स्तर पर होने वाली बैठकों में अब अनावश्यक फिजिकल मूवमेंट कम हो और संसाधनों की बचत हो सके।
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ईंधन बचत और प्रशासनिक दक्षता पर फोकस
सरकार का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले भी अधिकारियों और मंत्रियों से अपील की थी कि वे गैर-जरूरी यात्राओं से बचें और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। वर्चुअल कैबिनेट बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि समय की भी बचत होगी और प्रशासनिक निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे।
डिजिटल मीटिंग और अन्य राज्यों का उदाहरण
देश के कई राज्य पहले ही डिजिटल बैठकों को अपनाने लगे हैं। उत्तर प्रदेश में भी सरकारी बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा दिया गया है, जबकि राजस्थान में कारपूलिंग और डिजिटल मीटिंग सिस्टम लागू किए गए हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का मानना है कि तकनीक का उपयोग प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाता है और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ती है।
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प्रधानमंत्री की अपील और उसका प्रभाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में ईंधन बचत और संसाधनों के सही उपयोग को लेकर लगातार अपील की जा रही है। उन्होंने डिजिटल मीटिंग्स, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और अनावश्यक विदेशी निर्भरता को कम करने पर जोर दिया है। मध्यप्रदेश सरकार का यह फैसला उसी दिशा में एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।











