Peoples Samachar's Sting दर्द की दवा बनी नया नशा, नियमों को ताक पर रख बिक रहे प्रिस्क्रिप्शन, पूरा पत्ता लेने पर 10-15% तक की छूट भी

भारत में प्रेगाबालिन, ट्रामाडोल, गैबापेंटिन, कुछ नींद की दवाओं तथा कई कफ सिरप की बिक्री ड्रग एवं कॉस्मेटिक्स अधीनियम 1940 और 1945 के तहत नियंत्रित है। इन दवाओं की बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक के  प्रिस्क्रिप्शन पर की जानी चाहिए।
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 दर्द की दवा बनी नया नशा, नियमों को ताक पर रख बिक रहे प्रिस्क्रिप्शन, पूरा पत्ता लेने पर 10-15% तक की छूट भी

लेखक : राजीव कटारे, ग्वालियर। दर्द, बेचैनी, अनिद्रा और नसों से जुड़ी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का दुरुपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कम कीमत और कुछ स्थानों पर आसानी से उपलब्ध होने के कारण प्रेगाबालिन, ट्रामाडोल, गैबापेंटिन तथा कुछ नींद की दवाओं का गैर-चिकित्सीय उपयोग बढ़ने की आशंका है।

पीपुल्स समाचार की टीम ने सोमवार को शहर के विभिन्न इलाकों में स्टिंग ऑपरेशन कर यह जानने की कोशिश की कि क्या इन दवाओं की बिक्री निर्धारित नियमों के अनुसार हो रही है। सबसे पहले टीम जयारोग्य अस्पताल (हजार बिस्तर अस्पताल) के सामने स्थित मेडिकल स्टोरों पर पहुंची। यहां बिना किसी डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन, बिना मरीज की जानकारी पूछे और बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के प्रेगाबालिन, ट्रामाडोल तथा अन्य दवाएं आसानी से उपलब्ध करा दी गईं।

इसके बाद टीम ओल्ड मुरार डिस्पेंसरी के सामने स्थित मेडिकल स्टोरों पर पहुंची। यहां भी स्थिति लगभग समान मिली। कुछ दुकानदारों ने पूरा पत्ता खरीदने पर 10 से 15 प्रतिशत तक की छूट देने की पेशकश की। जांच के दौरान माधव नगर और नाका चंद्रवदनी क्षेत्र के कुछ मेडिकल स्टोरों पर भी बिना डॉक्टर के पर्चे के ऐसी दवाएं उपलब्ध कराई
यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। यदि इन दवाओं की बिक्री के लिए वैध चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन आवश्यक है, तो आखिर बिना पर्चे के इनकी बिक्री कैसे हो रही है? क्या संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण और निगरानी पर्याप्त है?

क्या कहते हैं नियम?

भारत में प्रेगाबालिन, ट्रामाडोल, गैबापेंटिन, कुछ नींद की दवाओं तथा कई कफ सिरप की बिक्री ड्रग एवं कॉस्मेटिक्स अधीनियम 1940 और 1945 के तहत नियंत्रित है। इन दवाओं की बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक के  प्रिस्क्रिप्शन पर की जानी चाहिए। मेडिकल स्टोरों को निर्धारित नियमों के अनुसार बिक्री का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होता है। नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

न्यूरोलॉजिस्ट एवं जेएच के न्यूरोलोजी विभाग के एचओडी  डॉक्टर दिनेश उदेंनिया के अनुसार प्रेगाबालिन और गैबापेंटिन नसों के दर्द, मिर्गी और कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के उपचार में उपयोग की जाती हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह इनके सेवन से अत्यधिक नींद, चक्कर आना, संतुलन बिगड़ना और याददाश्त प्रभावित होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं ट्रामाडोल का दुरुपयोग दौरे पड़ने, सांस लेने में कठिनाई और ओवरडोज जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

किन दवाओं का हो रहा है दुरुपयोग?

  • प्रेगाबालिन: नसों के दर्द, मिर्गी और एंजायटी के इलाज में उपयोग, लेकिन गलत इस्तेमाल से लत का खतरा।
  • ट्रामाडोल: तेज दर्द की दवा, दुरुपयोग से लत, ओवरडोज और सांस रुकने तक का खतरा।
  • गैबापेंटिन: नसों के दर्द और मिर्गी में उपयोग, बिना जरूरत सेवन से गंभीर दुष्प्रभाव संभव।
  • डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन: कफ सिरप में प्रयुक्त दवा, अधिक मात्रा में लेने पर नशा और मानसिक भ्रम हो सकता है।
  • जोल्प्रास : अनिद्रा और एंजायटी के इलाज में उपयोग होने वाली दवा, बिना चिकित्सकीय सलाह सेवन करना खतरनाक हो सकता है।

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