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Peoples Update Special :मध्यप्रदेश में वनकर्मियों को मिलेगी सुरक्षा की ट्रेनिंग, माफियाओं से निपटने के लिए मिलेगी मॉब कंट्रोल ट्रेनिंग

मध्यप्रदेश में वन और खनिज माफियाओं के लगातार बढ़ते हमलों के बीच वन विभाग ने मैदानी अमले की सुरक्षा को लेकर नई तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने दो दशक पहले उपलब्ध कराए गए हथियारों की साफ-सफाई कराने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही, हिंसक भीड़ और माफियाओं के हमलों से निपटने के लिए पुलिस के माध्यम से मॉब कंट्रोल ट्रेनिंग देने की योजना बनाई गई है।
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मध्यप्रदेश में वनकर्मियों को मिलेगी सुरक्षा की ट्रेनिंग, माफियाओं से निपटने के लिए मिलेगी मॉब कंट्रोल ट्रेनिंग
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संतोष चौधरी, भोपाल। वन विभाग ने मैदानी अमले की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हथियारों को दुरुस्त करने और विशेष प्रशिक्षण देने का फैसला लिया है। फिलहाल वनकर्मियों को पुलिस की तरह हथियार चलाने का अधिकार नहीं है, इसलिए मॉब कंट्रोल ट्रेनिंग पर जोर दिया जा रहा है। पहले चरण में पांच संवेदनशील जिलों में प्रशिक्षण शुरू होगा। वहीं वनकर्मियों को पुलिस बल की तरह अधिकार देने का प्रस्ताव अब भी शासन के पास विचाराधीन है।

माफियाओं के हमलों के बीच सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी

मध्यप्रदेश में वन और खनिज माफियाओं के मैदानी अमले पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने अपने मैदानी अमले को दो दशक पहले मिली बंदूकों और रिवाल्वरों की साफ-सफाई करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही, हिंसक भीड़ और माफियाओं के सामूहिक हमलों से निपटने के लिए वनकर्मियों को पुलिस के माध्यम से मॉब कंट्रोल ट्रेनिंग दिलाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। विभाग इसे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रहा है।

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लटेरी कांड के बाद लगातार उठ रही मांग

वर्ष 2022 में लटेरी कांड हुआ था। यहां आत्मरक्षा में गोली चलाने वाले चार वनकर्मियों पर ही उल्टा मुकदमा दर्ज कर दिया गया था। वन विभाग द्वारा अब तक करीब एक दर्जन बार वनकर्मियों को पुलिस के समान हथियार चलाने का अधिकार देने और फोर्स घोषित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। इसके बावजूद अब तक इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। इस कारण वनकर्मियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

हवाई फायर से ज्यादा का अधिकार नहीं

वर्ष 2000 में वनों की सुरक्षा और आत्मरक्षा के उद्देश्य से मैदानी अमले को राइफलें और रिवाल्वर उपलब्ध कराए गए थे। हालांकि, वर्तमान व्यवस्था के तहत आत्मरक्षा के विशेष मामलों को छोड़कर वनकर्मियों को गोली चलाने का कानूनी अधिकार नहीं है। वे इन हथियारों का उपयोग केवल डराने या हवाई फायर करने तक ही सीमित हैं। यदि कोई वनकर्मी विपरीत परिस्थितियों में फायर करता है तो उस पर पुलिस केस दर्ज होने के साथ मजिस्ट्रियल जांच का सामना भी करना पड़ता है।

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पहले चरण में 5 जिलों में मिलेगी मॉब कंट्रोल ट्रेनिंग

जब तक वनकर्मियों को कानूनी अधिकार नहीं मिलते, तब तक विभाग ने तात्कालिक सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) को पत्र लिखा है। अतिक्रमण हटाने और अवैध कटाई रोकने के दौरान पथराव और सामूहिक हमलों से बचने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले चरण में प्रदेश के सबसे संवेदनशील पांच जिलों-मुरैना, शिवपुरी, देवास, खंडवा और बुरहानपुर में मॉब कंट्रोल ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद जरुरत के अनुसार अन्य जिलों में भी इसे लागू किया जाएगा।

एक नजर में विभागीय आंकड़े

वन विभाग के विभागीय प्रतिवेदन के अनुसार प्रदेश में कुल 329 वन चौकियां हैं, जिनमें से 120 चौकियां हथियारों से लैस हैं। विभाग के पास 12 बोर की 3,170 बंदूकें और 286 रिवॉल्वर उपलब्ध हैं। प्रदेश में मैदानी अमले की संख्या 15,224 है। वर्ष 2025 में वन अपराधों के 51,008 मामले दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े वन क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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