Operation Hard Ball:बिश्नोई गैंग पर अमेरिका का शिकंजा, 24 गिरफ्तार, कई देशों में कार्रवाई

वॉशिंगटन। अमेरिका के न्याय विभाग ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई का दावा किया है। अमेरिका, कनाडा और यूरोप की कई जांच एजेंसियों ने मिलकर ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ चलाया, जिसके तहत कई देशों में एक साथ छापेमारी की गई। इस अभियान में 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और 37 लोगों के खिलाफ अलग अलग मामलों में आरोप तय किए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जांच में हत्या, रंगदारी, ड्रग्स तस्करी, हथियारों की सप्लाई और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आई है। हालांकि इन सभी मामलों में अंतिम फैसला अदालत करेगी।
कई देशों में एक साथ चला अभियान
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन हार्ड बॉल के दौरान अमेरिका, कनाडा और यूरोप में एक साथ कार्रवाई की गई। इस दौरान कई ठिकानों पर छापेमारी की गई और अलग-अलग मामलों में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह अभियान लंबे समय से चल रही जांच का हिस्सा था, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
चार्जशीट में कई बड़े नाम शामिल
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से दाखिल चार्जशीट में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा और जग्गू भगवानपुरिया समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि यह नेटवर्क अलग-अलग देशों में हत्या, जबरन वसूली, ड्रग्स तस्करी, हथियारों की सप्लाई, मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में सक्रिय था। हालांकि इन सभी आरोपों पर अदालत में सुनवाई होना अभी बाकी है।
निज्जर हत्याकांड का भी किया गया जिक्र
अमेरिकी चार्जशीट में वर्ष 2023 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में हुई हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का भी उल्लेख किया गया है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इस घटना की साजिश में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ की भूमिका रही। हालांकि यह आरोप जांच एजेंसियों के दावे हैं और इन पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।
ड्रग्स, हथियार और नकदी भी बरामद
जांच एजेंसियों ने अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में कोकीन, हेरोइन, नकदी और कई हथियार जब्त करने का दावा किया है। अधिकारियों के अनुसार यह नेटवर्क नशीले पदार्थों की तस्करी के जरिए करोड़ों रुपये की कमाई करता था और इसी पैसे का इस्तेमाल अपने आपराधिक नेटवर्क को बढ़ाने में किया जाता था। कई जगहों पर एक साथ तलाशी लेकर अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी जुटाए गए हैं।
दुनिया के कई देशों तक फैला नेटवर्क
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था। इसके सदस्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड समेत कई देशों में सक्रिय बताए गए हैं। एजेंसियों का दावा है कि अलग-अलग देशों में बैठकर यह नेटवर्क संगठित अपराधों को अंजाम देता था और आधुनिक संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर अपने सदस्यों के संपर्क में रहता था। अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ केवल आरोप लगाए गए हैं। कानून के अनुसार जब तक अदालत में आरोप साबित नहीं हो जाते, तब तक सभी आरोपी निर्दोष माने जाएंगे, जांच आगे भी जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों की एजेंसियों के साथ मिलकर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।











