पन्ना। मध्य प्रदेश के लिए गर्व की बात है कि भारत सरकार ने पन्ना के हीरे को GI (Geographical Indication) टैग प्रदान किया है। इस पहचान से न सिर्फ पन्ना के हीरे को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान मिलेगी, बल्कि अब इसे ‘पन्ना डायमंड’ के नाम से ब्रांड वैल्यू भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह पन्ना के युवाओं, कारीगरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि GI टैग मिलने से पन्ना के हीरे को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी और यह प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन जाएगा।
पन्ना के हीरे को अब आधिकारिक तौर पर जीआई (Geographical Indication) टैग मिल गया है। यह मध्य प्रदेश का 21वाँ ऐसा उत्पाद बन गया है, जिसे देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी नई पहचान मिलने जा रही है। पन्ना के लोगों, हीरा व्यापार से जुड़े अधिकारियों, कारीगरों और व्यवसायियों के लिए यह वर्षों पुरानी कोशिशों का सफल परिणाम है।
पन्ना के जिला हीरा अधिकारी रवि पटेल ने बताया कि 7 जून 2023 को पन्ना हीरे के लिए जीआई टैग की प्रक्रिया शुरू की गई थी। ढाई साल की मेहनत और प्रयासों के बाद अब पन्ना हीरे को 14 प्राकृतिक श्रेणियों में जीआई टैग मिल चुका है। यह उनकी और जिले के लिए अत्यंत खुशियों का क्षण है।
हीरा अधिकारी ने बताया कि जीआई टैग मिलने से पन्ना हीरे की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी। अब मार्केट में पन्ना का हीरा अपनी अलग पहचान बनाएगा। लोगों को पन्ना हीरा अलग दिखाई देगा और इसकी बिक्री बढ़ने से राज्य और जिला का राजस्व भी बढ़ेगा।
पन्ना हीरे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बारीक कार्बन लाइन है, जो इसे अन्य हीरों से अलग बनाती है। इस पतली लाइन की वजह से पन्ना हीरे की डिज़ाइनिंग में भी विशेषता आती है। अब पन्ना डायमंड को सर्टिफिकेट के साथ खरीदा जा सकेगा, जिससे इसकी ब्रांड वैल्यू और भरोसेमंदी बढ़ जाएगी।
प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि अब पन्ना डायमंड के नाम पर कोई भी दूसरा हीरा नहीं बेच सकेगा। जो ग्राहक पन्ना हीरा खरीदना चाहेगा, उसे केवल प्रमाणित पन्ना डायमंड ही मिलेगा। यह कदम व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।