पंचकूला के स्कूल में तीसरी के छात्र ने KG की बच्ची पर किया हमला, पत्थरों और गमले से पीटा; PGI रेफर

पंचकूला के एक स्कूल से सामने आई हिंसा की घटना ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेक्टर-20 स्थित संस्कृति मॉडल स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने KG में पढ़ने वाली छोटी बच्ची पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोप है कि छात्र ने बच्ची को पत्थरों से पीटा और फिर गमला उठाकर उस पर हमला किया। घटना इतनी भयावह थी कि बच्ची के बेहोश होने के बाद भी हमला नहीं रुका। आरोपी छात्र ने उसे काफी देर तक घसीटा भी। गंभीर रूप से घायल बच्ची को पहले पंचकूला के नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसकी हालत को देखते हुए PGI चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
पंचकूला के स्कूल में आखिर क्या हुआ?
मामला पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित संस्कृति मॉडल स्कूल का है। यहां KG कक्षा में पढ़ने वाली एक बच्ची पर उसी स्कूल में तीसरी कक्षा के छात्र ने हमला कर दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना स्कूल परिसर के अंदर हुई। बताया जा रहा है कि आरोपी छात्र ने पहले बच्ची पर पत्थरों से वार किए। इसके बाद उसने गमला उठाकर बच्ची को चोट पहुंचाई। हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। स्कूल जैसे स्थान पर, जहां छोटे बच्चे पढ़ने और सुरक्षित रहने के लिए भेजे जाते हैं, इस तरह की घटना ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
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बेहोश होने के बाद भी बच्ची को घसीटता रहा छात्र
इस घटना का सबसे डरावना पहलू यह है कि बच्ची के बेहोश होने के बाद भी उस पर हमला जारी रहा। जानकारी के मुताबिक, आरोपी छात्र ने बच्ची को काफी देर तक घसीटा। बताया जा रहा है कि उसने बेहोशी की हालत में भी बच्ची पर पत्थरों से वार किए। हालांकि, घटना के पीछे की असली वजह क्या थी और दोनों बच्चों के बीच पहले कोई विवाद हुआ था या नहीं, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
गंभीर हालत में PGI चंडीगढ़ रेफर हुई बच्ची
हमले के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घायल बच्ची को जल्द ही सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए PGI चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
स्कूल को बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित जगहों में से एक माना जाता है। अभिभावक अपने छोटे बच्चों को भरोसे के साथ स्कूल भेजते हैं कि वहां शिक्षक और कर्मचारी उनकी देखभाल करेंगे। लेकिन स्कूल परिसर के अंदर इस तरह की गंभीर घटना सामने आने के बाद कई सवाल उठना स्वाभाविक है।
घटना के समय स्कूल में निगरानी की क्या व्यवस्था थी? क्या परिसर में CCTV कैमरे लगे हैं? घटना के समय आसपास कोई शिक्षक या कर्मचारी मौजूद था? घायल बच्ची को प्राथमिक उपचार कितनी जल्दी दिया गया? स्कूल प्रबंधन ने घटना के बाद क्या कदम उठाए?
छोटे बच्चों में बढ़ती आक्रामकता को समझना क्यों जरूरी?
इस घटना का एक गंभीर पहलू बच्चों के व्यवहार और उनकी मानसिक स्थिति से भी जुड़ा है। बच्चों में गुस्सा, आक्रामकता या हिंसक व्यवहार के पीछे कई तरह के कारण हो सकते हैं। इनमें पारिवारिक माहौल, आसपास का वातावरण, तनाव, आपसी विवाद और हिंसक सामग्री का प्रभाव शामिल हो सकता है। ऐसे मामलों में बच्चों को केवल सजा देने के बजाय उनके व्यवहार को समझना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लेना भी जरूरी है।
बच्चों के व्यवहार पर इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चे के अचानक गुस्सा करने या मारपीट करने की आदत पर ध्यान दें।
- स्कूल में दोस्तों और सहपाठियों के साथ उसके व्यवहार को समझें।
- बच्चे की शिकायतों और भावनाओं को गंभीरता से सुनें।
- हिंसक व्यवहार को सामान्य शरारत समझकर नजरअंदाज न करें।
- जरूरत पड़ने पर स्कूल काउंसलर या बाल मनोवैज्ञानिक की मदद लें।



















