भारत जैसा नहीं है पड़ोसी देश का फॉर्मूला:जानिए पाकिस्तान में किसे और कैसे मिलता है आरक्षण का लाभ ?

पाकिस्तान में सरकारी नौकरियों और सिविल सेवाओं में कोटा सिस्टम की शुरुआत देश की स्थापना के बाद ही कर दी गई थी। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों और पिछड़े इलाकों के लोगों को अवसर देना था। समय के साथ इस व्यवस्था में कई बदलाव हुए और महिलाओं, दिव्यांगों को भी इसमें शामिल किया गया।
क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर आधारित है कोटा व्यवस्था
पाकिस्तान में आरक्षण का आधार जाति या सामाजिक वर्ग नहीं है। वहां कई प्रांतों, क्षेत्रों, शहरी और ग्रामीण आबादी को प्रतिनिधित्व देने के लिए कोटा निर्धारित किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि देश के सभी हिस्सों के लोगों को सरकारी सेवाओं में भागीदारी मिल सके। इसी सोच के साथ कोटा प्रणाली को विकसित किया गया।
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देश बनने के बाद शुरू हुई थी व्यवस्था
बता दें कि सरकारी नौकरियों में कोटा सिस्टम की शुरुआत वर्ष 1948 में हुई थी। उस समय अलग-अलग क्षेत्रों की जनसंख्या और राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हिस्सेदारी तय की गई। पूर्वी बंगाल, पंजाब, कराची और अन्य क्षेत्रों को अलग-अलग प्रतिशत के आधार पर प्रतिनिधित्व दिया गया। हालांकि शुरुआती वर्षों में इस व्यवस्था को लेकर कई असंतोष भी सामने आए।
पूर्वी पाकिस्तान और कराची में उठे सवाल
पाकिस्तान बनने के बाद पूर्वी बंगाल की आबादी देश में सबसे अधिक थी, लेकिन उसे अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिला। इसी तरह कराची को भी उसकी आबादी के अनुपात में सीमित हिस्सेदारी दी गई थी। इन कारणों से कई क्षेत्रों में असंतोष की स्थिति बनी रही। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह क्षेत्रीय असंतुलन बाद के राजनीतिक विवादों का एक कारण भी बना।
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समय के साथ मेरिट को भी मिली जगह
रिपोर्ट्स के मुताबिक कोटा सिस्टम में वर्ष 1949 के बाद महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। पहली बार कुछ सीटों को योग्यता आधारित चयन के लिए आरक्षित किया गया। बाद के संविधानों में भी कोटा व्यवस्था को जारी रखा गया और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के साथ मेरिट को संतुलित करने का प्रयास किया गया। इससे चयन प्रक्रिया को अधिक व्यापक बनाने की कोशिश हुई।
सिंध और अन्य क्षेत्रों के लिए बनी विशेष व्यवस्था
बाद के वर्षों में सिंध प्रांत के लिए अलग प्रावधान लागू किए गए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच प्रतिनिधित्व का अनुपात तय किया गया ताकि दोनों क्षेत्रों को अवसर मिल सकें। 1973 के संविधान में कोटा प्रणाली को कानूनी संरक्षण दिया गया और कई अन्य क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया। इससे व्यवस्था को संवैधानिक आधार प्राप्त हुआ।
महिलाओं और दिव्यांगों को भी मिला लाभ
1990 के दशक में पाकिस्तान ने महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष कोटा लागू किया। इसके बाद यह व्यवस्था केवल क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रही। हालांकि कई बार निर्धारित सीटें भर नहीं पातीं, विशेषकर कुछ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पद खाली रह जाते हैं। इसके बावजूद समर्थकों का मानना है कि यह प्रणाली क्षेत्रीय संतुलन और समान अवसर सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है।












