इस्लामाबाद। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित का एक बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अपने बयान में उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि, अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है, तो पाकिस्तान को भारत के बड़े शहरों को निशाना बनाना चाहिए।
उन्होंने खास तौर पर भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नाम लेते हुए कहा कि, ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को इन शहरों पर बम गिराने चाहिए। इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर कूटनीतिक हलकों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। हालांकि, अब्दुल बासित के बयान पर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब्दुल बासित ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि, अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है, तो पाकिस्तान को जवाब देने के लिए भारत को निशाना बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि, अगर अमेरिका या उसके सहयोगियों के खिलाफ सीधे जवाब देना संभव नहीं हो, तो पाकिस्तान को भारत के बड़े शहरों को निशाना बनाने पर विचार करना चाहिए।
बासित का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और अन्य देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
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अब्दुल बासित का नाम भारत में नया नहीं है। वह 2014 से 2017 तक भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त के तौर पर तैनात रहे थे। इस दौरान उन्होंने करीब तीन साल तक दिल्ली में रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। पाकिस्तान की विदेश सेवा में उन्होंने 1982 में प्रवेश किया था और लंबे समय तक विभिन्न देशों में राजनयिक पदों पर कार्य किया।
भारत आने से पहले वह मई 2012 से मार्च 2014 तक जर्मनी में पाकिस्तान के राजदूत के रूप में तैनात रहे थे। भारत में अपने कार्यकाल के दौरान भी वह कई बार कश्मीर और भारत-पाक संबंधों को लेकर विवादित टिप्पणियों के कारण चर्चा में रहे थे।
बासित के बयान की सबसे ज्यादा आलोचना इस बात को लेकर हो रही है कि उन्होंने भारत के दो बड़े शहरों दिल्ली और मुंबई का नाम लेकर टिप्पणी की। दिल्ली देश की राजधानी है, जबकि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मानी जाती है। इन दोनों शहरों का नाम लेकर हमला करने की बात कहना कई लोगों को बेहद आपत्तिजनक लगा है।
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बासित के बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर बहस छिड़ गई है। कई भारतीय यूजर्स और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और उकसाने वाला बयान बताया है। उनका कहना है कि, इस तरह की टिप्पणियां दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकती हैं। कुछ विश्लेषकों ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कुछ राजनीतिक और कूटनीतिक वर्गों में भारत विरोधी बयानबाजी का इस्तेमाल घरेलू राजनीति के लिए किया जाता रहा है।
अब्दुल बासित का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी तनाव चरम पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की वायुसेना ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में काबुल, कंधार और पक्तिका जैसे इलाकों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया है कि, पाकिस्तानी सेना ने काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर भी बमबारी की है। अफगान पक्ष के मुताबिक, इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
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अफगान अधिकारियों का कहना है कि, हमलों में कई रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा है और इसमें महिलाओं तथा बच्चों समेत कई निर्दोष लोग मारे गए हैं। तालिबान सरकार ने इन हमलों को मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए पाकिस्तान पर अपनी हवाई सीमा के उल्लंघन का आरोप लगाया है। इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध लंबे समय से कई मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण रहे हैं। इनमें कश्मीर मुद्दा, सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन और आतंकवाद जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी कई बार तनाव देखने को मिला है। ऐसे में किसी भी पक्ष से दिया गया विवादित बयान दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित कर सकता है।