Pakeezah :क्या आप जानते हैं? मीना कुमारी की 'पाकीजा' से जुड़ा है एमपी के सोहागपुर का नाम

हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल 'पाकीजा' आज भी अपनी शानदार कहानी, खूबसूरत संवाद और मधुर संगीत के लिए जानी जाती है। अभिनेत्री मीना कुमारी और निर्देशक कमाल अमरोही की इस फिल्म का एक खास रिश्ता मध्य प्रदेश के छोटे से कस्बे सोहागपुर से भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्म के मशहूर दृश्य में सुनाई देने वाला 'सुहागपुर' शब्द सतपुड़ा की वादियों में बसे इसी कस्बे से प्रेरित माना जाता है।
कैसे शुरू हुई सोहागपुर और पाकीजा की कहानी?
मुंबई की फिल्मी दुनिया से जुड़े रहे मरहूम सैयद इलियास के मुताबिक, सोहागपुर क्षेत्र के आदिवासी गांव छेड़का की दो बहनें बेला और हमीदा लंबे समय तक मुंबई में काम करती थीं। एक दिन दोनों अपने गांव जाने के लिए छुट्टी मांग रही थीं। बातचीत के दौरान उन्होंने "सुहागपुर" का जिक्र किया। यह नाम सुनकर फिल्म निर्माता और निर्देशक कमाल अमरोही चौंक गए और उन्होंने उत्सुकता से इस जगह के बारे में जानकारी ली। बताया जाता है कि "सुहाग" शब्द की मिठास और उसके अर्थ ने कमाल अमरोही को काफी प्रभावित किया।
सोहागपुर पहुंचे थे कमाल अमरोही
सैयद इलियास के अनुसार, इस नाम से प्रभावित होकर कमाल अमरोही अपने आर्ट डायरेक्टर के साथ बॉम्बे-हावड़ा मेल से सोहागपुर पहुंचे थे। उन्होंने रेलवे स्टेशन और आसपास के माहौल को करीब से देखा और यहां की कई बारीकियों को समझा। बाद में मुंबई के अशोका स्टूडियो में सोहागपुर रेलवे स्टेशन जैसा सेट तैयार किया गया, जहां फिल्म के कुछ अहम दृश्य फिल्माए गए।
फिल्म का वह यादगार दृश्य
फिल्म 'पाकीजा' का एक दृश्य आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है।
ट्रेन में सफर कर रही साहिबजान (मीना कुमारी) की आंख खुलती है और उन्हें एक चिट्ठी मिलती है, जिसमें लिखा होता है-
"आपके पांव बहुत खूबसूरत हैं, इन्हें जमीन पर मत उतारिएगा... मैले हो जाएंगे।"
इसके बाद साहिबजान पूछती हैं, "कौन-सा स्टेशन है भइया?"
जवाब आता है— "सुहागपुर... सुहागपुर..."
यही संवाद सोहागपुर को हिंदी सिनेमा की यादगार कहानियों में शामिल कर देता है।
कौन थीं बेला और हमीदा?
स्थानीय लोगों के अनुसार, छेड़का गांव की बेला और हमीदा का मीना कुमारी से गहरा संबंध था।
बेला, मीना कुमारी की हेयर ड्रेसर थीं।
हमीदा, मीना कुमारी की डुप्लीकेट के रूप में काम करती थीं।
बाद में दोनों मुंबई में ही बस गईं।
एक छोटे कस्बे से बड़े पर्दे तक का सफर
यह महज एक संयोग हो सकता है, लेकिन सोहागपुर का नाम हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में दर्ज हो गया। यह कहानी सिर्फ एक फिल्म की नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक जुड़ाव की भी है, जिसने एक छोटे से कस्बे को बड़े पर्दे की यादों का हिस्सा बना दिया।
आज पर्यटन का केंद्र बन रहा है छेड़का गांव
इन दिनों छेड़का गांव पर्यटन के लिहाज से तेजी से पहचान बना रहा है। मढ़ई आने वाले पर्यटक भी इस गांव की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि, ज्यादातर गाइड और स्थानीय लोग आज भी मीना कुमारी और 'पाकीजा' से जुड़े इस दिलचस्प रिश्ते से अनजान हैं। इसलिए यह कहानी अब भी बहुत कम लोगों तक ही पहुंच पाई है।












