बुंदेलखंड में शोक की लहर:नहीं रहे पद्मश्री अखाड़ा गुरू 'दाऊ भगवानदास रायकवार', भोपाल AIIMS में ली आखिरी सांस

पद्मश्री सम्मानित अखाड़ा गुरु दाऊ भगवानदास रायकवार का भोपाल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने बुंदेलखंड की पारंपरिक शस्त्र कला ‘अखाड़ा’ को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। सागर में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।
नहीं रहे पद्मश्री अखाड़ा गुरू 'दाऊ भगवानदास रायकवार', भोपाल AIIMS में ली आखिरी सांस
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की प्राचीन शस्त्र कला ‘अखाड़ा’ को नई पहचान दिलाने वाले पद्मश्री (2026) से सम्मानित अखाड़ा गुरु भगवानदास रैकवार ‘दाऊ’ का निधन हो गया। उन्होंने भोपाल स्थित एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान आखिरी सांस ली। वे पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे और वेंटिलेटर थे।

    परिजनों के अनुसार, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सबसे पहले सागर के चैतन्य हॉस्पिटल में 17 मार्च को भर्ती कराया गया था। वहां इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद 7 अप्रैल को उन्हें बेहतर इलाज के लिए भोपाल एम्स रेफर किया गया, लेकिन उन्हें बचा नहीं सके।

    राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

    दाऊ के निधन पर प्रदेश के कई नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, राज्यमंत्री लखन पटेल और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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    आज उनकी अंतिम यात्रा सागर के रामपुरा वार्ड स्थित छत्रसाल अखाड़े से निकाली जाएगी। राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होने की उम्मीद है।

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    अखाड़ा कला को दुनिया तक पहुंचाया

    भगवानदास रैकवार ‘दाऊ’ ने अपना पूरा जीवन बुंदेलखंड की पारंपरिक शस्त्र कला ‘अखाड़ा’ के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में लगा दिया। दाऊ जी ने इस परंपरा को गांव-गांव से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनकी मेहनत की वजह से कई युवाओं ने इस कला को अपनाया और इसे आगे बढ़ाया। 

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    पद्मश्री से होने वाले थे सम्मानित

    जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 के लिए उनका चयन पद्मश्री सम्मान के लिए किया गया था। यह सम्मान उन्हें भारतीय पारंपरिक मार्शल आर्ट और अखाड़ा विद्या के संरक्षण और प्रशिक्षण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया जा रहा था।

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    25 जनवरी को केंद्र सरकार ने उनके नाम की घोषणा की थी। लेकिन दुर्भाग्य से, वे इस सम्मान को खुद ग्रहण नहीं कर पाए। सम्मान मिलने से पहले ही उनकी तबीयत बिगड़ गई और आखिरकार उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

    सांस की बीमारी से थे परेशान

    बताया जा रहा है कि दाऊ पिछले काफी समय से सांस से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे। धीरे-धीरे उनकी हालत गंभीर होती गई। मार्च महीने में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी हालत लगातार नाजुक बनी रही। अंत में शनिवार रात उन्होंने भोपाल में अंतिम सांस ली।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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