PlayBreaking News

पद्म भूषण डॉ. सुभाष कश्यप का निधन, 97 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

देश ने एक महान संवैधानिक विद्वान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के मजबूत स्तंभ को खो दिया है। पद्म भूषण से सम्मानित Subhash C. Kashyap का 97 वर्ष की उम्र में उनके आवास पर निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, उनकी मृत्यु कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट के कारण हुई।
Follow on Google News
पद्म भूषण डॉ. सुभाष कश्यप का निधन, 97 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

देश के प्रख्यात संवैधानिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. सुभाष सी. कश्यप का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली। जानकारी के अनुसार, उनकी मृत्यु कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट (हृदय और फेफड़ों के कार्य रुक जाने) के कारण हुई। डॉ. कश्यप भारतीय संविधान, संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के गहन जानकार माने जाते थे। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में संसदीय कार्यप्रणाली और संवैधानिक विषयों पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं तथा देश के राजनीतिक और विधायी विमर्श को नई दिशा दी।

/img/99/1780564915877

संसद से लंबा जुड़ाव

डॉ. सुभाष कश्यप का भारतीय संसद से बहुत गहरा जुड़ाव रहा। वे 1953 से संसद से जुड़े थे और लगभग चार दशकों तक उन्होंने काम किया। वे सातवीं, आठवीं और नौवीं लोकसभा के महासचिव (Secretary-General) रहे। 1984 से 1990 तक उन्होंने लोकसभा सचिवालय के प्रमुख के रूप में काम किया और संसद की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।

यह भी पढ़ें: नहीं रहे पहलाज निहलानी : दिग्गज फिल्म निर्माता और पूर्व CBFC चेयरमैन का निधन, 76 की उम्र में ली अंतिम सांस

संविधान और कानून में योगदान

वे भारतीय संविधान, संसदीय नियमों और संवैधानिक कानून के बड़े विशेषज्ञ माने जाते थे। उन्होंने संविधान के कामकाज, लोकतंत्र और कानून व्यवस्था पर कई महत्वपूर्ण किताबें और शोध कार्य किए।

अंतरराष्ट्रीय पहचान

डॉ. कश्यप ने 1983 तक जिनेवा स्थित अंतर्राष्ट्रीय संसदीय प्रलेखन केंद्र (IPU) का नेतृत्व किया। वे किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन का नेतृत्व करने वाले पहले भारतीय बने। वे सरकार के संवैधानिक सलाहकार भी रहे और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही।

शिक्षा और करियर की शुरुआत

उन्होंने अपना करियर इलाहाबाद में पत्रकार, वकील और शिक्षक के रूप में शुरू किया था। 1953 में वे संसद सचिवालय से जुड़े और फिर लंबे समय तक देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा रहे।

यह भी पढ़ें: मैं भाग नहीं रहा हूं... केंद्र सरकार की पहुंच बहुत लंबी, उनसे कोई पंगा नहीं ले सकता, भगोड़े कहे जाने पर बोले ललित मोदी

महत्वपूर्ण पद और जिम्मेदारियां

  • पूर्व लोकसभा महासचिव
  • राष्ट्रीय संविधान समीक्षा आयोग के सदस्य
  • ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ समिति के सदस्य
  • भारतीय राष्ट्रीय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष
  • नीति अनुसंधान केंद्र (CPR) में मानद शोध प्रोफेसर

सम्मान और पुरस्कार

उनके योगदान के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले-

  • पद्म भूषण
  • मोतीलाल नेहरू पुरस्कार (दो बार)
  • जवाहरलाल नेहरू फैलोशिप (1996–98)
  • विदुर सम्मान
  • राजीव स्मृति सम्मान
  • विधि सेवा सम्मान
  • भूमिपुत्र पुरस्कार
  • HOASF (सैन फ्रांसिस्को अकादमी) का मानद पदक
Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts