मुंह का छाला कब बन जाता है Cancer?तंबाकू खाने वालों के लिए एक्सपर्ट की बड़ी चेतावनी, जानिए ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षण

तंबाकू, सिगरेट, गुटखा और वेपिंग का बढ़ता इस्तेमाल सिर्फ फेफड़ों या दिल को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि यह ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) जैसी गंभीर बीमारी का भी बड़ा कारण बन रहा है। चिंता की बात यह है कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य मुंह की समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते पहचान और जांच करवा ली जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।
देश में क्यों बढ़ रहे हैं ओरल कैंसर के मामले?
भारत में ओरल कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी, वेपिंग और शराब का बढ़ता सेवन माना जा रहा है। लोग अक्सर मुंह में होने वाले छालों, मसूड़ों से खून आने या अन्य छोटी समस्याओं को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही कई बार गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है। अगर मुंह का कोई छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक नहीं होता, तो उसे सामान्य समस्या मानने के बजाय तुरंत जांच करानी चाहिए।
ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
ओरल कैंसर की शुरुआत में कई ऐसे संकेत दिखाई देते हैं, जिन्हें लोग सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं। मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखाई देना, लंबे समय तक न भरने वाला छाला, चबाने या निगलने में दर्द होना, मुंह में गांठ या सूजन महसूस होना, दांतों का ढीला पड़ना, बोलने में परेशानी, लगातार मुंह से बदबू आना या किसी हिस्से का सुन्न पड़ जाना इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। खासतौर पर तंबाकू का सेवन करने वालों को ऐसे संकेत दिखने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
क्या हर मुंह का छाला कैंसर होता है?
डॉक्टरों का कहना है कि, हर मुंह का छाला कैंसर का संकेत नहीं होता। सामान्य छाले आमतौर पर तीन से सात दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर कोई छाला लगातार बढ़ रहा हो, उसमें बार-बार खून निकल रहा हो, दर्द बढ़ता जा रहा हो या खाने-पीने और बोलने में दिक्कत होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर इसके साथ मुंह में सफेद या लाल धब्बे भी दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
कम उम्र के लोग भी हो रहे हैं शिकार
पहले ओरल कैंसर ज्यादातर 50 से 75 साल की उम्र के लोगों में देखा जाता था, लेकिन अब यह बीमारी युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में धूम्रपान, तंबाकू, वेपिंग और शराब के बढ़ते चलन के कारण ओरल कैंसर के मामलों में इजाफा हुआ है। इसके अलावा खराब ओरल हाइजीन भी इस खतरे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।
समय पर पहचान से बच सकती है जान
अगर ओरल कैंसर की पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाए, तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी अधिक रहती है। शुरुआती चरण में इलाज शुरू होने पर मरीज के ठीक होने की संभावना 80 से 90 प्रतिशत तक हो सकती है। इसलिए मुंह में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत जांच कराना सबसे बेहतर उपाय है।
ओरल कैंसर से कैसे करें बचाव?
ओरल कैंसर से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी और वेपिंग जैसी आदतों से दूरी बनाई जाए। शराब का सेवन सीमित करें, रोजाना दांत और मुंह की अच्छी तरह सफाई रखें और नियमित रूप से डेंटल चेकअप कराएं। अगर मुंह में कोई छाला, गांठ, सफेद या लाल धब्बा लंबे समय तक बना रहे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें। समय पर जांच और सही इलाज ही इस गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।











