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नागपुर हिंसा पर विपक्ष का हमला, भाजपा सरकार को ठहराया जिम्मेदार, केंद्रीय मंत्री आठवले ने ‘छावा’ फिल्म को बताया वजह

नागपुर हिंसा पर विपक्ष का हमला, भाजपा सरकार को ठहराया जिम्मेदार, केंद्रीय मंत्री आठवले ने ‘छावा’ फिल्म को बताया वजह
नई दिल्ली। नागपुर में भड़की हिंसा को लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा नीत महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी सांसदों ने मंगलवार को इस घटना को साजिश करार देते हुए सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कहा। वहीं, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने हिंसा का कारण फिल्म 'छावा' को बताया, जिससे कथित रूप से औरंगजेब के खिलाफ लोगों की भावनाएं भड़क गईं।

हिंसा के बाद कर्फ्यू, कई इलाकों में तनाव

सोमवार को औरंगजेब की कब्र के खिलाफ प्रदर्शन के बाद नागपुर के कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी। इस दौरान उपद्रवियों ने कई घरों और वाहनों में तोड़फोड़ की, जिसके बाद प्रशासन को शहर के संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। पुलिस ने 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है और पांच प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

‘छावा’ फिल्म ने बढ़ाई नाराजगी : आठवले

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा, "औरंगजेब की कब्र को लेकर आंदोलन चल रहा है। यह कब्र वहां 500 साल से है, लेकिन फिल्म ‘छावा’ देखने के बाद संभाजी महाराज की हत्या को लेकर लोग आक्रोशित हो गए हैं। इसीलिए विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हालांकि, हम प्रदर्शनकारियों से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें और हिंसा से बचें।"

विपक्ष ने भाजपा सरकार पर बोला हमला

आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने इस हिंसा को सुनियोजित साजिश करार देते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "भाजपा नागपुर और पूरे महाराष्ट्र में नफरत फैलाने की कोशिश कर रही है। जब तक भाजपा सत्ता में है, तब तक भारत में शांति संभव नहीं है। होली से पहले उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह माहौल खराब करने की कोशिश हुई थी।" उन्होंने यह भी कहा, ये चिल्ला रहे हैं औरंगजेब, औरंगजेब, जनता कह रही है कट गई जेब...। कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 21वीं सदी के भारत में लोग 17वीं और 18वीं सदी के इतिहास को लेकर लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, राज्य और केंद्र सरकार को इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। यह हिंसा क्यों भड़की, इस पर सरकार को जवाब देना चाहिए। आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "दंगे, चाहे नागपुर में हों, मणिपुर में हों या उत्तर प्रदेश में, कहीं भी ठीक नहीं हैं। हिंसा के पीछे जो लोग हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी पार्टी के नेता हों।" उन्होंने आगे कहा, "केंद्र सरकार को महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगना चाहिए, जो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रही है। दुनिया अंतरिक्ष में जाने की बात कर रही है, लेकिन हम इतिहास में उलझे हैं। यह किस पार्टी का एजेंडा है, यह सब जानते हैं।" तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष ने कहा, "नागपुर की हिंसा ने केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत’ के नारे को खोखला साबित कर दिया है। ऐसे समय में जब हमें रोजगार, किसान आत्महत्या और महंगाई पर ध्यान देना चाहिए, भाजपा लोगों को भटकाने के लिए नया मुद्दा बना रही है।" भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता पी संदोष कुमार ने भी इस हिंसा की निंदा की और कहा कि महाराष्ट्र सरकार को इसकी जवाबदेही लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, "यह समाज को विभाजित करने और इतिहास को खंगालकर विवाद खड़ा करने की कोशिश है।"

पुलिस की कार्रवाई और मौजूदा हालात

नागपुर के पुलिस आयुक्त रवींद्र सिंघल ने बताया कि इस हिंसा के सिलसिले में 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है और 5 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पुलिस हालात पर नजर बनाए हुए है और जल्द ही स्थिति सामान्य करने का प्रयास कर रही है।
Mithilesh Yadav
By Mithilesh Yadav

वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...

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