Operation Tiger :क्या है ऑपरेशन टाइगर, महाराष्ट्र की राजनीति में क्यों हो रही बार- बार चर्चा

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसकी वजह बना है ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम, जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हो रही है। उद्धव ठाक (UBTरे) के सांसदों के संभावित दल-बदल की अटकलों के बीच यह शब्द चर्चा का केंद्र बन गया है। हालांकि इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है।
शिंदे ने छह सांसदों का किया स्वागत
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने घोषणा की है कि शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसद उनकी पार्टी में शामिल हो गए हैं। इनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर के नाम शामिल हैं।
मुंबई में पत्रकारों से चर्चा करते हुए शिंदे ने कहा कि यह घटनाक्रम जून 2022 में शुरू हुए उस आंदोलन का दूसरा चरण है, जब शिवसेना के 40 विधायकों ने बगावत कर पार्टी से अलग राह चुनी थी। उनके मुताबिक यह कदम बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और हिंदुत्व के मूल सिद्धांतों को बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
क्या है ऑपरेशन टाइगर?
ऑपरेशन टाइगर कोई आधिकारिक राजनीतिक अभियान नहीं है। यह एक राजनीतिक शब्द है, जिसका इस्तेमाल संभावित टूट और बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर किया जा रहा है। दरअसल, टाइगर या बाघ शिवसेना की पहचान और संस्थापक बाल थाकरे की राजनीति का प्रमुख प्रतीक रहा है। इसी वजह से इस संभावित राजनीतिक घटनाक्रम को ऑपरेशन टाइगर नाम दिया गया है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद पहले अलग संसदीय समूह बना सकते हैं और बाद में शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी तक संबंधित सांसदों ने सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है।
ठाकरे गुट सतर्क, लगातार हो रही बैठकें
संभावित टूट की आशंका के बीच उद्धल ठाकरे के नेतृत्व वाला गुट अपने सांसदों को एकजुट रखने में जुटा है। पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों से संपर्क बनाए हुए है और संगठनात्मक बैठकों का दौर जारी है। ठाकरे खेमे को आशंका है कि 2022 जैसी स्थिति दोबारा न बन जाए, जब बड़ी संख्या में विधायकों के जाने से पार्टी को बड़ा झटका लगा था।
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2022 में क्या हुआ था?
साल 2022 का राजनीतिक संकट महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हुआ था। शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। उसी घटनाक्रम के बाद से ठाकरे गुट किसी भी संभावित टूट को लेकर बेहद सतर्क रहता है। यही वजह है कि ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं को पार्टी गंभीरता से ले रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल राजनीतिक अटकल है या महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
ऑपरेशन टाइगर के पीछे दिल्ली कनेक्शन की भी चर्चा
महाराष्ट्र की राजनीतिक हलचल के बीच ऑपरेशन टाइगर को लेकर कई तरह की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। विपक्षी दलों का दावा है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी एकनाथ शिंदे का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव और आत्मविश्वास किसी बड़े केंद्रीय समर्थन के बिना संभव नहीं है। इस चर्चा को उस समय और बल मिला जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि शिंदे को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का समर्थन प्राप्त है।
राज ठाकरे के अनुसार, भाजपा के भीतर भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को साधने और सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए एक मजबूत समानांतर शक्ति केंद्र तैयार किया जा रहा है। विपक्ष यह भी आरोप लगा रहा है कि शिंदे गुट को लगातार मजबूत किए जाने से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।











