गाजा में विस्थापित शिविरों में रहने वाले बच्चों का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में छोटे बच्चे एक गुड़िया को कंधे पर रखकर जनाजा निकालते नजर आ रहे हैं। यह दृश्य उस कड़वी हकीकत को दर्शाता है जिसे गाजा के बच्चे हर दिन जी रहे हैं।
वीडियो में पांच छोटे बच्चे अस्थायी स्ट्रेचर पर गुड़िया रखकर जनाजा निकालते हैं। ये बच्चे खेल नहीं रहे, बल्कि वह मंजर दोहराते हैं जो उन्होंने अपने आसपास देखा है। उस उम्र में जब बच्चों के हाथों में खिलौने और आंखों में सपने होना चाहिए, वहां उनकी जिंदगी में मौत और जनाजा शामिल हो गया है।
गाजा में अब लुका-छिपी या खिलौना कारों से खेलने का समय खत्म हो गया है। बच्चों के लिए 'जनाजा निकालना' ही उनका नया खेल बन गया है, क्योंकि उन्होंने चारों ओर सिर्फ यही देखा है।
अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद शुरू हुए दो साल के भीषण संघर्ष के बाद गाजा फिलहाल एक नाजुक संघर्षविराम (Ceasefire) से गुजर रहा है। लेकिन यूनिसेफ की रिपोर्ट बताती है कि बच्चों की स्थिति अभी भी बेहद गंभीर है।
गाजा के बच्चों के सामने सिर्फ बमबारी का ही खतरा नहीं है। कुपोषण उनकी जान का सबसे बड़ा खतरा बन गया है। पर्याप्त भोजन और पोषण की कमी से हजारों बच्चे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
साथ ही, बार-बार स्कूलों पर हमले शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर चुके हैं। जिन स्कूलों को हमले से बचाया गया, वे अब विस्थापित परिवारों के लिए शरणस्थली बन चुके हैं।
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गाजा के बच्चों के लिए सुरक्षा जोखिम हर दिन बढ़ रहे हैं। उनकी मानसिक सेहत पर गंभीर असर पड़ा है और स्थिति सुधारने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
युद्ध की कीमत का अंदाजा हाल ही में सामने आए आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 'लैंसेट ग्लोबल हेल्थ' जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के पहले 16 महीनों में गाजा में 75,000 से अधिक लोग मारे गए। इसमें महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का हिस्सा 56% था।
एक अलग स्टडी, मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर डेमोग्राफिक रिसर्च के अनुसार, दिसंबर 2024 तक गाजा में मृतकों की संख्या 78,318 तक पहुंच गई। युद्ध के कारण जीवन प्रत्याशा में भारी गिरावट आई; 2023 में 44% और 2024 में 47% की कमी दर्ज की गई।