INS Taragiri :रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले-तारागिरी केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की नौसैनिक शक्ति का प्रतीक है

नेशनल डेस्क। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को स्वदेशी रूप से निर्मित स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी (INS Taragiri) को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया। नौसेना डॉकयार्ड में वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में इसकी कमीशनिंग हुई। रक्षा मंत्री ने कहा कि देश की ऊर्जा और व्यापारिक सुरक्षा काफी हद तक समुद्री मार्गों पर निर्भर करती है, इसलिए एक मजबूत और आधुनिक नौसेना आज की जरूरत है। यह युद्धपोत भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- तारागिरी केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की नौसैनिक शक्ति का प्रतीक है। यह नेशनल प्राइड है।
आत्मनिर्भर भारत की ताकत का प्रतीक
पूर्वी नौसेना कमान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि तारागिरी का शामिल होना रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। स्वदेशी तकनीक से तैयार यह आधुनिक युद्धपोत देश की जहाज निर्माण क्षमता और तकनीकी दक्षता का उदाहरण है। रक्षा मंत्री ने भी इसे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि यह कदम नौसेना को और सशक्त बनाएगा।
6,670 टन का अत्याधुनिक युद्धपोत
प्रोजेक्ट 17ए के तहत तैयार किया गया यह चौथा फ्रिगेट मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में बनाया गया है। करीब 6,670 टन वजनी इस जहाज की डिजाइन ऐसी है कि इसका रडार क्रॉस-सेक्शन कम रहता है, जिससे यह दुश्मन की नजर से बचकर रणनीतिक मिशन पूरे कर सकता है। आधुनिक इंजीनियरिंग और उन्नत तकनीक के कारण यह जटिल समुद्री परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम है।
तेज गति के साथ लंबी दूरी तक चलने की क्षमता
इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसमें 200 से ज्यादा MSME इकाइयों का योगदान रहा है। यह संयुक्त डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली से संचालित होता है, जिससे इसे अधिक गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता मिलती है। यह भारत के रक्षा उद्योग की मजबूती और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
मिसाइल, एंटी-सबमरीन सिस्टम और राहत मिशन में सक्षम
तारागिरी में आधुनिक हथियार प्रणाली लगाई गई है, जिनमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और पनडुब्बी रोधी युद्धक उपकरण शामिल हैं। आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली से लैस यह जहाज समुद्री खतरों का तेजी से जवाब देने में सक्षम है। युद्ध अभियानों के अलावा इसे मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिससे यह शांति और संकट दोनों स्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारतीय नौसेना की ताकत, 130 युद्धपोत
भारतीय नौसेना के बेड़े में इस समय 130 से अधिक युद्धपोत शामिल हैं, जो समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और रणनीतिक मिशनों के लिए तैनात रहते हैं। इनमें विमानवाहक पोत, डिस्ट्रॉयर (विध्वंसक), फ्रिगेट, कोरवेट और पनडुब्बियां शामिल हैं, जिनकी अपनी-अपनी विशेष भूमिका होती है। देश के पास फिलहाल दो विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत सेवा में हैं, जो समुद्र में भारत की ताकत को और मजबूत बनाते हैं। इसके अलावा करीब एक दर्जन विध्वंसक पोत, दर्जन भर से ज्यादा फ्रिगेट, लगभग दो दर्जन कोरवेट श्रेणी के युद्धपोत और बड़ी संख्या में पनडुब्बियां भी नौसेना के बेड़े का हिस्सा हैं। समय के साथ यह संख्या बदलती रहती है, क्योंकि नए अत्याधुनिक जहाज लगातार शामिल किए जाते हैं और पुराने युद्धपोत चरणबद्ध तरीके से सेवा से हटाए जाते हैं।
स्टील्थ फ्रिगेट क्या होता है?
स्टील्थ फ्रिगेट एक आधुनिक युद्धपोत होता है, जिसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह दुश्मन के रडार, सोनार और अन्य निगरानी प्रणालियों से आसानी से पकड़ में न आए। “स्टील्थ” का मतलब होता है छिपकर काम करने की क्षमता, यानी यह जहाज समुद्र में कम दिखाई देता है और गुप्त मिशन बेहतर तरीके से पूरा कर सकता है।
स्टील्थ फ्रिगेट की खासियतें
जहाज की बाहरी बनावट ऐसी होती है कि रडार तरंगें टकराकर वापस कम लौटें, जिससे दुश्मन को इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इसमें मिसाइल, एंटी-एयर सिस्टम और पनडुब्बी रोधी हथियार लगे होते हैं, जिससे यह हवा, समुद्र और पानी के अंदर से आने वाले खतरों का सामना कर सकता है। स्टील्थ फ्रिगेट निगरानी, सुरक्षा, एस्कॉर्ट मिशन, दुश्मन पर हमला और समुद्री सीमा की रक्षा जैसे कई काम कर सकता है। इसमें आधुनिक रडार, सोनार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगे होते हैं, जिससे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। स्टील्थ फ्रिगेट ऐसा युद्धपोत है जो कम दिखाई देता है लेकिन बेहद ताकतवर होता है, और आधुनिक नौसेना की अहम जरूरत माना जाता है।












