न्यूरेंबर्ग चिड़ियाघर ने जगह की कमी के चलते 12 स्वस्थ बाबून बंदरों को मार डाला, लोगों ने शुरू किया विरोध प्रदर्शन

जर्मनी के न्यूरेंबर्ग शहर के मशहूर टियरगार्टन चिड़ियाघर ने 12 स्वस्थ बाबूनों को मारने का निर्णय लिया। चिड़ियाघर का कहना है कि उनके पास इन जानवरों को रखने की जगह नहीं बची थी। यह फैसला लंबे समय से विचार-विमर्श के बाद लिया गया, लेकिन इस पर अब भारी विरोध हो रहा है।
चिड़ियाघर ने कहा- जगह की कमी
न्यूरेंबर्ग चिड़ियाघर में गिनी बाबून की संख्या 43 तक पहुंच गई थी, जबकि वहां केवल 25 बंदरों और उनके बच्चों के लिए ही जगह थी। इससे बंदरों के बीच झगड़े बढ़ने लगे थे। चिड़ियाघर ने दावा किया कि उन्होंने कई सालों तक दूसरी जगह इन बंदरों को भेजने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया।
जानवर प्रेमी संगठन कर रहे विरोध
बंदरों को मारने की घोषणा के बाद, कई जानवर प्रेमी संगठनों और आम लोगों ने चिड़ियाघर के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। मंगलवार को कुछ प्रदर्शनकारी चिड़ियाघर की दीवार फांदकर अंदर घुस गए। एक महिला ने तो जमीन पर अपने हाथ चिपका लिए। पुलिस ने सभी को थोड़ी ही दूर से गिरफ्तार कर लिया।
कैसे मारे गए बंदर
चिड़ियाघर ने बताया कि जिन बंदरों को मारा गया, वे न तो गर्भवती थीं और न ही किसी वैज्ञानिक अध्ययन का हिस्सा थीं। उन्हें गोली मारकर खत्म किया गया। उनके शरीर के कुछ हिस्से रिसर्च के लिए रखे गए और बाकी मांस को चिड़ियाघर के मांसाहारी जानवरों को खिला दिया गया।
पशु अधिकार संगठनों की नाराजगी
'प्रो वाइल्डलाइफ' जैसे संगठनों ने इसे कानून के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि यह हत्या रोकी जा सकती थी और चिड़ियाघर की ब्रीडिंग मैनेजमेंट पूरी तरह से गलत रही। उन्होंने चिड़ियाघर के अधिकारियों पर कानूनी शिकायत भी दर्ज कराई है।
पहले भी हुई हैं ऐसी घटनाएं
यूरोप के चिड़ियाघरों में जानवरों को मारना कोई नई बात नहीं है। 2014 में डेनमार्क के कोपेनहेगन चिड़ियाघर ने एक स्वस्थ जिराफ को बच्चों के सामने मारकर शेरों को खिला दिया था। तब भी लोगों ने इसका जमकर विरोध किया था।












