Aakash Waghmare
19 Jan 2026
Aakash Waghmare
19 Jan 2026
Shivani Gupta
19 Jan 2026
नई दिल्ली। भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) के पक्ष में कुल 37 नामांकन पत्र दाखिल किए गए हैं। ये नामांकन देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं। खास बात यह रही कि संसदीय दल की ओर से दाखिल नामांकन पत्र पर प्रस्तावक के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के हस्ताक्षर दर्ज हैं। इसके अलावा इस नामांकन में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जैसे दिग्गज नेताओं के नाम भी शामिल हैं। प्रत्येक नामांकन पत्र पर 20 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर किए गए हैं।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगला बड़ा कार्यक्रम पार्टी मुख्यालय में होने जा रहा है। कल सुबह 11 बजे बीजेपी मुख्यालय में करीब 700 प्रतिनिधि एकत्र होंगे। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। उनकी उपस्थिति में नितिन नबीन के निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
20 जनवरी को नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इस अवसर पर पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह के अलावा बीजेपी शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री, प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी शामिल होंगे।
[featured type="Featured"]
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद संभालने के अगले ही दिन, यानी 21 जनवरी को नितिन नबीन एक अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में पार्टी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी शामिल होंगे। बैठक के दौरान संगठन की आगामी रणनीति और दिशा पर चर्चा की जाएगी। साथ ही नितिन नबीन इस अवसर पर पदाधिकारियों को संबोधित भी करेंगे।
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव के लिए जारी की गई मतदाता सूची में कुल 5708 मतदाताओं के नाम शामिल हैं। यह सूची 30 राज्यों में हुए संगठनात्मक चुनावों के आधार पर तैयार की गई है, जहां राज्य परिषद और केंद्रीय परिषद के चुनाव पूरे हो चुके हैं। हालांकि अभी कुछ राज्यों में संगठन चुनाव की प्रक्रिया लंबित है। दिल्ली, हरियाणा, त्रिपुरा और कर्नाटक जैसे राज्यों में अभी संगठनात्मक बदलाव होना बाकी है।