ईरान- इजराइल के बीच जो युद्ध चल रहा, उसमें ट्रंप ने हस्तक्षेप की जो नई पहल की है, उससे न्यूयार्क के आम नागरिक काफी असंतुष्ट दिख रहे। हर लोग अपनी राय अपने सोच के हिसाब से बता रहे हैं। शहर के फॉक्स न्यूज चैनल के आगे एक बड़ा स्क्रीन लगा हुआ है। बहुत से लोग इस खबर से जुड़ी सारी अपडेट वहां के उसी स्क्रीन पर देख रहे हैं। इस खबर को सुन अमेरिका का हर एक आम इंसान बैचेन और भयभीत है। हर किसी के मन में बैचेनी और डर के सवाल लगातार उठ रहे। क्या ट्रंप का लिया गया यह फैसला वाकई सही है?
न्यूयार्क में वर्किंग वहां के आम नागरिक जो पेशे से एक शिक्षक हैं, (माइक लेविन) उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें यह खबर पता चली वह खुद इस सोच में पड़ चुके हैं कि पता नहीं ट्रंप के इस फैसले का अगला असर क्या होगा? क्योंकि कभी ये फैसले सही भी साबित होते हैं और कभी गलत भी। अब इस बार युद्ध की यह घोषणा प्रभावित तीनों देशों पर क्या असर डालेगी यह तो वक्त ही बताएगा।
वहीं 76 साल की एक बुर्जुर्ग महिला शेरी फाइमैन ने कहा कि सरकार के इस फैसले ने मेरे मन को भयभीत कर दिया है। उन्हें अभी भी समझ नहीं आ रहा कि ऐसा फैसला क्यों लिया गया? आखिर इसकी जरूरत क्या थी? ट्रंप का यह निर्णय देश के लिए वाकई खतरनाक हो सकता है। उन्होंने सीधे तौर पर ट्रंप पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कभी-कभी कुछ मसले राजनीति से हटकर देशहित में लिए जाने चाहिए। उनकी नजर में यह कदम बिल्कुल सही नहीं।
भीड़ में खड़े एक आम नागरिक ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कभी भी किसी और देश के मामलों में हर वक्त दखल देना सही नहीं। जैसे हर आम नागरिक को अपने हिसाब से जीने का अधिकार है ठीक उसी तरह हर देश को अपने हिसाब से संचालित करने- कराने का अधिकार भी होना चाहिए। पर आज के समय में कई बड़े देश छोटे देशों के आंतरिक मामलों में लागातार हस्तक्षेप करते रहते हैं, जो बिल्कुल ठीक नहीं। हर छोटे देशों को भी अपने हिसाब से जीने का पूरा अधिकार होना ही चाहिए। यह स्थिति वाकई बेहद चिंताजनक है।
न्यूयॉर्क की 42वीं स्ट्रीट पर खड़े मोडिबो सिसोको इस पूरी खबर को एक अलग नजरिये से देखते हैं। क्योंकि वह खुद एक स्ट्रीट वेंडर हैं तो उन लोगों की समस्याओं को बहुत अच्छे से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध में युद्ध के बाद अगर सबसे ज्यादा किसी पर असर पड़ता है तो वह है एक गरीब आम तबका। वैसे ही ईरान की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं ऐसे में युद्ध समाप्ति के बाद जान-माल की हानि के बाद बढ़ेगी वहां की महंगाई। खाने- पीने से लेकर लोगों की आम जरूरतों की चीजें। जब आम नागरिक के पास किसी भी बड़े स्तर पर फैसले लेने का अधिकार नहीं होता तो सबसे ज्यादा आर्थिक शोषण भी उसी का होता है। तो यह युद्ध हर तरह से एक आम इंसान को चोटिल करने के लिए सबसे ज्यादा कारगर साबित होगी। इससे बचा जाए यही बेहतर निर्णय होगा।
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विकसित इस दुनिया में हर देश एक -दूसरे के साथ बहुत तेजी से जुड़ा हुआ है। आज सारे देश एक साथ मिलकर एक-दूसरे की जरूरतें पूरी करते हैं। ऐसे में तेल की मंहगाई, आर्थिक गिरावट का असर सिर्फ प्रभावित क्षेत्रों तक ही नहीं बल्कि दुनिया के हर एक कोने में पड़ता है। इसलिए अब जितनी शांति से काम लिया जाए उतना अच्छा है। लगातार के हुए इन संर्घर्षों से अब पूरी दुनिया थक चुकी है। अब हर एक आम इंसान शांति चाहता है, युद्ध नहीं।