ईरानी सेना के नए कमांडर इन चीफ का ऐलान :जनरल वाहिदी ने संभाली IRGC की कमान, क्या होने वाला है बड़ा हमला?

तेहरान। ईरान के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा पल आया हो जब देश के सर्वोच्च नेता और सैन्य नेतृत्व एक साथ ऐसे हमलों का शिकार हुए हों। अमेरिकी और इजराइली हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई उच्च सैन्य अधिकारी मारे गए। इनमें ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) के चीफ मोहम्मद पाकपुर और आर्मी चीफ अमीर हातमी शामिल हैं। इस गंभीर संकट के बाद ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति को फिर से संगठित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
ईरान ने IRGC के नए कमांडर-इन-चीफ के रूप में ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी को नियुक्त किया। उनका असली नाम वहीद शाहचेरागी है और वे ईरानी सैन्य और राजनीतिक गलियारों में एक प्रभावशाली नाम माने जाते हैं। वाहिदी की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि, ईरान अब इतिहास के सबसे बड़े पलटवार की तैयारी कर रहा है।
ईरान की असममित युद्ध रणनीति के मास्टर
अहमद वाहिदी IRGC की कुद्स फोर्स के पहले कमांडर रह चुके हैं, जो विदेशों में गुप्त ऑपरेशंस और ईरान के सहयोगी समूहों जैसे हिजबुल्लाह और हमास के नेटवर्क को संभालती है। वे ईरान के रक्षा मंत्री और गृह मंत्री रह चुके हैं और दिसंबर 2025 में IRGC के डिप्टी कमांडर बने थे।
वाहिदी को ईरान की असममित युद्ध रणनीति (Asymmetric Warfare) का जनक माना जाता है। इस रणनीति के तहत सीधे युद्ध की बजाय छोटे, घातक और अचानक हमलों के माध्यम से दुश्मन को कमजोर किया जाता है। इनमें ड्रोन अटैक, मिसाइल स्ट्राइक और प्रॉक्सी वार शामिल हैं। उनकी विशेषज्ञता के कारण ही ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों का मजबूत जाल बुन रखा है।
नए कमांडर की चुनौतियां
अहमद वाहिदी के सामने अब तीन बड़ी चुनौतियां हैं-
प्रतिशोध की अगुआई: IRGC ने पहले ही अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर इतिहास के सबसे भीषण हमले की धमकी दी है। इन हमलों की प्लानिंग अब वाहिदी के हाथों में होगी।
सैन्य मनोबल का पुनर्निर्माण: सर्वोच्च नेता और पूर्व चीफ की मौत के बाद सेना का मनोबल कमजोर हुआ है। वाहिदी को सैनिकों को फिर से एकजुट करना होगा।
क्षेत्रीय गठबंधन बनाए रखना: लेबनान, सीरिया और यमन में फैले ईरान के सहयोगी समूहों को एक साथ लाकर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोलना।
वाहिदी ने मीडिया से कहा है कि, ईरानी लोगों ने शहीदों के रास्ते पर चलने का वादा दोहराया है और लोगों की एकता और नेतृत्व ईरान की ताकत का मूल आधार है।
वाहिदी का सैन्य और राजनीतिक सफर
अहमद वाहिदी का जन्म 27 जून 1958 को शिराज, ईरान में हुआ। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट, औद्योगिक इंजीनियरिंग में मास्टर और रणनीतिक अध्ययन में पीएचडी की है। 1979 की इस्लामी क्रांति के तुरंत बाद वे IRGC में शामिल हुए और तेजी से वरिष्ठ पदों तक पहुंचे।
- 1988-1998: IRGC कुद्स फोर्स के पहले कमांडर
- 2009-2013: ईरान के रक्षा मंत्री
- एक्सपीडिएंसी डिस्कर्नमेंट काउंसिल के सदस्य
- सुप्रीम नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के चेयरमैन
वाहिदी इंटरपोल की रेड नोटिस लिस्ट में भी शामिल हैं। 1994 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में यहूदी केंद्र पर हुए बम विस्फोट में उनकी कथित संलिप्तता के चलते उन पर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने कई प्रतिबंध लगाए हैं।
ईरान में 40 दिनों का शोक घोषित
हमलों के बाद पूरे ईरान में 40 दिनों का शोक घोषित किया गया। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि, खामेनेई ने हमलों में अपने दामाद और बहू को भी खो दिया। देश में भावनाओं का उबाल है और जनता ने शहीदों को सम्मान देने का वादा किया है।
ईरान की मीडिया ने पुष्टि की है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरानी सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए हैं। इस बीच IRGC ने वाहिदी को नए कमांडर के रूप में घोषित किया और उन्होंने तुरंत बदले की आग में अपनी तैयारी शुरू कर दी।
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वाहिदी का संदेश और अमेरिका-इजरायल के लिए चेतावनी
वाहिदी ने स्पष्ट किया है कि ईरान अब अपनी ताकत के चरम पर है। उन्होंने कहा कि, पिछली गलतियों को दोहराना किसी के लिए भी बड़ी गलती होगी। हमारी सेना और जनता ने एकजुट होकर इतिहास के सबसे बड़े पलटवार की तैयारी कर ली है।
उन्होंने अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर हमलों की कसम खाई है और यह साफ कर दिया है कि ईरान अपने सहयोगियों और क्षेत्रीय नेटवर्क के माध्यम से जवाबी कार्रवाई करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
तेल व्यापार पर होगा असर
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की प्रतिक्रिया से मध्य पूर्व की जटिलता और बढ़ सकती है। अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर हमले के खतरे के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और तेल व्यापार प्रभावित हो सकते हैं। ईरान के नए कमांडर-इन-चीफ वाहिदी की रणनीति और असममित युद्ध तकनीक वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ाने का प्रमुख कारण बन सकती है।
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