नई दिल्ली। भारत में आने वाले समय में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल महंगा हो सकता है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकार मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है। हालांकि अभी इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हाल ही में टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी एक समीक्षा बैठक में मोबाइल डेटा पर टैक्स लगाने का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद सरकार ने दूरसंचार विभाग (DoT) से इस विषय पर अध्ययन करने को कहा है।सरकार यह जानना चाहती है कि मोबाइल डेटा के उपयोग पर टैक्स लगाना संभव है या नहीं। साथ ही अगर ऐसा किया जाता है तो इसका ढांचा कैसा होगा और इससे लोगों तथा टेलीकॉम सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा।
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कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सरकार जिस विकल्प पर विचार कर रही है, उसमें मोबाइल डेटा के हर जीबी इस्तेमाल पर करीब ₹1 का टैक्स लगाया जा सकता है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो जब भी कोई यूजर इंटरनेट डेटा का उपयोग करेगा, उसके रिचार्ज या बिल में यह अतिरिक्त शुल्क जुड़ सकता है। हालांकि यह अभी सिर्फ एक संभावित मॉडल है और इसे लागू करने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर मोबाइल डेटा पर ₹1 प्रति GB का टैक्स लागू किया जाता है तो इससे सरकार को हर साल लगभग 22,900 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में डेटा पर छोटा सा टैक्स भी बड़ी राशि में बदल सकता है। इसी वजह से सरकार इस प्रस्ताव के फायदे और नुकसान दोनों का अध्ययन करना चाहती है।
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां मोबाइल डेटा की कीमत काफी कम है। सस्ते इंटरनेट की वजह से देश में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। आज लोग मोबाइल इंटरनेट का उपयोग वीडियो देखने, सोशल मीडिया चलाने, ऑनलाइन गेम खेलने, वीडियो कॉल करने और डिजिटल पेमेंट जैसी सेवाओं के लिए करते हैं। रील्स और वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते उपयोग के कारण डेटा की खपत पहले से कई गुना बढ़ चुकी है।
एक अहम बात यह भी है कि मोबाइल रिचार्ज और पोस्टपेड बिल पर पहले से ही 18 प्रतिशत GST लगाया जाता है। यानी टेलीकॉम सेवाओं का उपयोग करने वाले लोग पहले से टैक्स दे रहे हैं। अगर भविष्य में मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर अलग से टैक्स लगाया जाता है, तो यह मौजूदा GST के अलावा एक नया शुल्क होगा। इसी वजह से यह मुद्दा लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
फिलहाल सरकार ने दूरसंचार विभाग से कहा है कि वह इस प्रस्ताव पर पूरी तरह अध्ययन करे। विभाग को यह देखना होगा कि इस तरह का टैक्स लागू करने से उपभोक्ताओं, टेलीकॉम कंपनियों और डिजिटल इकोनॉमी पर क्या असर पड़ेगा। रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही सरकार इस पर कोई निर्णय ले सकती है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मोबाइल डेटा पर नया टैक्स निश्चित रूप से लगाया जाएगा।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डेटा टैक्स को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। रेडिट और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी इस विषय पर चर्चा हो रही है। हालांकि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार डेटा टैक्स का प्रस्ताव आगे बढ़ाती है तो इससे इंटरनेट सेवाओं की कीमत थोड़ी बढ़ सकती है। वहीं दूसरी ओर सरकार को इससे अतिरिक्त राजस्व भी मिल सकता है। फिलहाल यह पूरा मामला अध्ययन और विचार के स्तर पर है। आने वाले समय में सरकार की रिपोर्ट और फैसले के बाद ही यह साफ होगा कि मोबाइल डेटा पर नया टैक्स लगाया जाएगा या नहीं।