छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 8 अप्रैल 2026 से नई रोस्टर व्यवस्था लागू होने जा रही है। इस बदलाव के तहत अब तीन डिवीजन पीठ और 13 एकल पीठ रोजाना अलग-अलग मामलों की सुनवाई करेंगी। इसका उद्देश्य लंबित मामलों के निपटारे को तेज और व्यवस्थित बनाना है।
नई रोस्टर व्यवस्था में मामलों का स्पष्ट बंटवारा किया गया है। पहली पीठ जनहित याचिकाओं, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं, 2020 तक की आपराधिक अपील, अवमानना से जुड़े मामलों और धारा 482 के तहत याचिकाओं की सुनवाई करेगी। दूसरी पीठ को सिविल मामले, कंपनी अपील, कर से जुड़े प्रकरण और 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामलों की जिम्मेदारी दी गई है, साथ ही यह वाणिज्यिक अपीलीय मामलों को भी देखेगी। तीसरी पीठ उन आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी जो अन्य पीठों को आवंटित नहीं हैं, इसके अलावा 2016 तक की अपील और 2022 तक के कुछ विशेष मामलों की सुनवाई भी इसी पीठ में होगी।
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नई व्यवस्था में पहली डिवीजन पीठ में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के साथ न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल सुनवाई करेंगे। दूसरी डिवीजन पीठ में न्यायमूर्ति संजय के अग्रवाल और न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत को जिम्मेदारी दी गई है। तीसरी डिवीजन पीठ में न्यायमूर्ति एन के व्यास अन्य न्यायाधीशों के साथ मामलों की सुनवाई करेंगे। इसके अलावा मुख्य न्यायाधीश की एक विशेष एकल पीठ भी निर्धारित की गई है।
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तीनों डिवीजन पीठों के साथ 13 एकल पीठ भी रोजाना सुनवाई करेंगी, जिससे मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। हाईकोर्ट प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से कार्य प्रणाली और अधिक प्रभावी बनेगी और न्याय प्रक्रिया को गति मिलेगी।