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बाढ़ से तबाह नेपाल में भारत बना सहारा? PM बालेन शाह ने पहले कहा ‘थैंक्यू इंडिया’, फिर चीन का किया जिक्र

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है। इस मुश्किल घड़ी में भारत और चीन की ओर से मिली मदद का नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में जिक्र किया। PM बालेन शाह ने भारत को मदद के लिए ‘थैंक्यू’ कहा और इसके बाद चीन का भी आभार जताया। उन्होंने बताया कि आपदा के बाद दोनों देशों की ओर से तकनीकी मदद और सहयोग दिया गया।
बाढ़ से तबाह नेपाल में भारत बना सहारा? PM बालेन शाह ने पहले कहा ‘थैंक्यू इंडिया’, फिर चीन का किया जिक्र
भारत की ओर से मिली मदद का नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने जिक्र किया

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। इस बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुधवार, 2 सितंबर को संसद में भारत और चीन की मदद के लिए दोनों देशों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के दौरान दूसरे देशों से मदद लेने से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं था। प्रधानमंत्री शाह ने संसद में कहा कि सरकार ने आपदा आने के पहले दिन से ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग लेना शुरू कर दिया था। उनके मुताबिक, भारत और चीन ने नेपाल को तकनीकी मदद उपलब्ध कराई और प्रभावित इलाकों में स्थिति का जायजा लेने के लिए विशेषज्ञों को भेजा।

भारत और चीन के तकनीशियनों ने किया हवाई सर्वे

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि भारत और चीन की टीमों ने आपदा के शुरुआती दौर में ही प्रभावित क्षेत्रों का आकलन शुरू कर दिया था। इन टीमों ने हवाई सर्वे समेत कई तरीकों से यह समझने की कोशिश की कि किन इलाकों में कितना नुकसान हुआ है और वहां राहत दलों का पहुंचना संभव है या नहीं। शाह ने कहा कि दोनों देशों के तकनीशियनों ने मुश्किल परिस्थितियों में काम किया। खास तौर पर भारतीय तकनीशियन दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचने में सफल रहे। उन्होंने बताया कि कई जगहों पर हालात बेहद कठिन थे। बाढ़ के बाद जमा हुई कीचड़ और गाद इतनी ज्यादा थी कि वहां खुदाई करने वाली मशीनों के लिए भी काम करना मुश्किल हो गया था। यहां तक कि सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवानों के लिए भी सुरक्षित जगह पर खड़े होकर काम करना चुनौती बन गया था।

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भारत लगातार भेज रहा राहत सामग्री

नेपाल में 26 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। अब तक 1,127 लोगों की मौत की पुष्टि होने की बात सामने आई है, जबकि 4,000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है। बाढ़ के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने नेपाल को हर संभव मदद देने का भरोसा दिलाया था। इसके बाद भारत की ओर से लगातार राहत सामग्री नेपाल भेजी जा रही है। इसमें खाने-पीने की चीजें, दवाइयां, पुल बनाने से जुड़ा सामान और विशेषज्ञों की टीमें शामिल हैं। भारत की ओर से भेजी गई मदद का उद्देश्य प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों को तेज करना है।

'इतनी बड़ी आपदा में मदद न लेने का सवाल ही नहीं'

संसद में प्रधानमंत्री बालेन शाह से पूछा गया कि क्या सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मदद लेने में किसी तरह की हिचकिचाहट दिखाई थी। इस पर शाह ने साफ कहा कि इतनी बड़ी आपदा के समय अंतरराष्ट्रीय सहयोग लेने से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि नेपाल ने समय रहते दूसरे देशों और निजी क्षेत्र के साथ तालमेल बनाकर मदद हासिल करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी बताया कि मित्र देशों की ओर से भेजे गए तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को समझने और राहत अभियान की दिशा तय करने में मदद की।

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जानकारी देने में देरी के आरोप पर PM की सफाई

बाढ़ के दौरान लोगों को समय पर जानकारी नहीं देने को लेकर भी सरकार से सवाल पूछे गए। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने नागरिकों तक सूचना पहुंचाने की कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि करीब 11 लाख SMS संदेश नागरिकों को भेजे गए थे। शाह के मुताबिक, जैसे ही सरकार को आपदा की जानकारी मिली, लोगों को मोबाइल संदेशों के जरिए सतर्क किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आपदा इतनी बड़ी थी कि इसके प्रभाव का पहले से अनुमान लगाना बेहद मुश्किल था। इसके बावजूद सरकार ने उपलब्ध माध्यमों से लोगों तक सूचना पहुंचाने की कोशिश की।

राहत और बचाव में कोऑर्डिनेशन पर भी जवाब

संसद में राज्य और स्थानीय स्तर की सरकारों के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्य और स्थानीय स्तर के अधिकारियों के संपर्क में है। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग स्तर की सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल बनाकर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। उनका कहना था कि आपदा की गंभीरता को देखते हुए सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

टनल में फंसे लोगों के रेस्क्यू पर क्या बोले शाह?

बाढ़ के बाद एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की टनल में फंसे लोगों के बचाव को लेकर भी प्रधानमंत्री से सवाल किया गया। इस पर शाह ने कहा कि टनल में रेस्क्यू अभियान सामान्य बचाव कार्यों से अलग और बेहद तकनीकी है। उन्होंने बताया कि राज्य की सभी पार्टियां और संबंधित एजेंसियां शुरुआत से ही बचाव अभियान में शामिल हैं। हालांकि, टनल के अंदर रेस्क्यू करने के लिए विशेष तकनीकी जानकारी और उपकरणों की जरूरत होती है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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