भोपाल। इजरायल-ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की खबरों के बीच डीजल-पेट्रोल को लेकर लोग, खास तौर से किसान चिंता करने लगे हैं। नर्मदापुरम के पिपरिया शहर में स्थित एक पेट्रोल पंप पर अचानक डीजल लेने वालों की भीड़ बढ़ गई। किसानों से लेकर आम वाहन चालकों तक, हर कोई जल्द से जल्द अपनी टंकियां फुल करवाने के लिए लाइन में लगे थे। दरअसल क्षेत्र में यह अफवाह थी कि कुछ ही दिनों में डीजल मिलना बंद हो जाएगा। इसलिए कई किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में बड़े-बड़े ड्रम और टंकियां लेकर पहुंचे। हालात ऐसे हो गए कि कर्मचारियों को नंबर लगाकर डीजल देना पड़ा। कई ट्रॉलियों में एक साथ पांच-पांच टंकियां रखी दिखाई दीं, जिन्हें भरवाने के लिए किसान घंटों इंतजार करते रहे।
नर्मदांचल के किसान नेता विजय चौधरी बाबू इस बारे में कहते हैं कि टीवी न्यूज और सोशल मीडिया में बिना तथ्यों की खबरों के चलते अफवाहों ने जोर पकड़ा है। इस सीजन में गेहूं की कटाई होती है, ऐसे में हार्वेस्टर के लिए रोज 150 से 200 लीटर डीजल लगता है। इसके लिए किसान पहले भी डीजल का कुछ इंतजाम करते थे, लेकिन हड़बड़ी नहीं रहती थी। इसके साथ ही भूसा मशीन वालों को भी डीजल का इंतजाम करके रखना पड़ता था। हालांकि अब लगभग हर गांव के दो-पांच किलोमीटर के अंतर पर पेट्रोल पंप उपलब्ध हैं। कुछ गांवों से दूरी जरूर है, लेकिन कहीं कहीं तो गांव में ही पेट्रोल पंप हैं, इसलिए पिछले साल तक किसान चिंतित नहीं थे। बाबू चौधरी ने बताया कि हमने किसानों को समझाया है कि कोई दिक्कत नहीं आने वाली, डीजल आराम से मिलेगा, तसल्ली रखें। हालांकि एक चिंता किसानों को दाम बढ़ने की भी है। उन्हें लगता है महंगा डीजल खरीदने से अच्छा है सस्ता डीजल खरीदें।
अफवाह का असर सिर्फ एक पंप तक सीमित नहीं रहा। कई स्थानों पर बाइक सवार और कार चालक भी अपनी टंकियां फुल करवा रहे हैं। एक पेट्रोल पंप के मैनेजर ने बताया कि जो व्यक्ति रोज 200-300 रुपए का पेट्रोल लेता था वो लगभग 500 रुपए तक का पेट्रोल ले रहा है। हर व्यक्ति डरा हुआ है कि कहीं अचानक से दाम नहीं बढ़ जाएं या शॉर्टेज नहीं हो जाए। हालांकि शहरों के पेट्रोल पंपों पर अभी लाइन लगाने जैसी स्थिति नहीं है। शहरों में कई पेट्रोल पंप होने से भीड़ नहीं लग रही जबकि छोटे नगरों में एक या दो पेट्रोल पंप होने से लोग जरूरत से ज्यादा डीजल-पेट्रोल ले रहे हैं।
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इस संबंध में हमने मप्र पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन से बात की तो उनके पास भी ऐसी सूचनाएं हैं कि लोग हड़बड़ी में स्टॉक कर रहे हैं। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया के कारण पैनिक हो रहा है, कई जगह से सूचनाएं हैं। रायसेन जिले के बकतरा में एक पेट्रोल पंप की सेल 1500 लीटर प्रतिदिन थी, वहां 20 हजार लीटर डीजल-पेट्रोल बिक गया। लोग महीने भर का स्टॉक ले रह हैं, हालांकि ऐसा करना खतरनाक है। उन्होंने बताया कि हर पेट्रोल पंप पर 4 से 5 दिन का स्टॉक रहता है। ऑयल डिपोज में करीब 7 दिन का स्टॉक रहता है। 10 दिन का स्टॉक तो मूवेबल रहता है यानि टैंकर्स से ट्रांसपोर्ट होता रहता है। रिफाइनरीज में 20 से 25 दिन का स्टॉक, टर्मिनल्स में लगभग 30 दिन का स्टॉक रहता है। इस तरह 90 दिन का स्टॉक तो है ही। और भारत सिर्फ एक देश से तेल नहीं खरीदता। अब हम रूस से भी 30 दिन तक अनलिमिटेड तेल खरीद सकते हैं, तो लोगों को चिंता करने की जरूरत बिल्कुल नहीं है।
प्रदेश में पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यह जानकारी ऑयल कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने अपर मुख्य सचिव खाद्य रश्मि अरुण शमी द्वारा मंत्रालय में की पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा के दौरान दी। वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा के निर्देश दिए थे। समीक्षा बैठक में ऑयल कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान खपत को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। अपर मुख्य सचिव ने ऑयल कम्पनियों को जिलावार अपने फील्ड ऑफिसर तथा डिपो प्रभारी को संभागायुक्त एवं कलेक्टर से संपर्क करने तथा नियमित रूप से स्टॉक की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि डीजल, पेट्रोल एवं एलपीजी की जमाखोरी एवं कालाबाजारी किसी भी स्थिति में न हो। डीलर स्तर पर प्रतिदिन स्टॉक की समीक्षा की जाए।