'52 ब्लू':नेहा धूपिया का इंटरनेशनल डेब्यू, बोलीं- ये अनुभव रहा परिवर्तनकारी

नेहा धूपिया की पहली अंतरराष्ट्रीय फिल्म '52 ब्लू' को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। फिल्म से उनका फर्स्ट लुक जारी कर दिया गया है, जिसमें वह बिल्कुल अलग और भावनात्मक अंदाज में नजर आ रही हैं। मिस्र के चर्चित फिल्म निर्माता अली एल अरबी के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक युवा भारतीय फुटबॉल प्रेमी की कहानी को सामने लाती है, जो प्रवासी मजदूर बनकर फीफा वर्ल्ड कप 2022 तक की अपनी यात्रा तय करता है।
नेहा धूपिया का इंटरनेशनल डेब्यू, बोलीं- ये अनुभव रहा परिवर्तनकारी
AI जनरेटेड सारांश
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    निर्देशक अली एल अरबी के साथ काम करने को नेहा ने खास अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि उनका कहानी कहने का अंदाज बेहद ईमानदार और जमीन से जुड़ा हुआ है, जो कलाकारों को अपनी सीमाओं को तलाशने की आजादी देता है। कोच्चि जैसे वास्तविक लोकेशन पर शूटिंग ने फिल्म को और प्रामाणिक बनाया है। '52 ब्लू' सपनों, आजादी और मां के विश्वास की उन अनदेखी ताकतों को सामने लाती है, जो इंसान की पहचान गढ़ती हैं। 

    फिल्म की कहानी में सपने, संघर्ष और पहचान की तलाश

    '52 ब्लू' एक संवेदनशील कहानी है, जो एक ऐसे लड़के के सफर को दिखाती है जो सीमित माहौल में पला-बढ़ा है, लेकिन बड़े सपने देखता है। कोच्चि में बड़े पैमाने पर शूट हुई इस फिल्म में आशीष (यादव शशिधर) की जिंदगी के जरिए प्रवासी जीवन,पारिवारिक रिश्तों और आत्म-पहचान जैसे पहलुओं को उभारा गया है। उसका सफर उसे कतर तक ले जाता है, जहां वह अपने आदर्श लियोनेल मेस्सी से मिलने का सपना देखता है।

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    नेहा धूपिया का बदला हुआ किरदार

    इस फिल्म में आदिल हुसैन भी अहम भूमिका में हैं, जो नेहा धूपिया के पति का किरदार निभा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि दोनों पहली बार स्क्रीन पर साथ नजर आएंगे। वहीं नेहा इस फिल्म में एक युवा लड़के की मां का किरदार निभा रही हैं-जो उनके अब तक के करियर से बिल्कुल अलग है और कहानी की भावनात्मक धुरी बनता है।

    '52 ब्लू' रहा परिवर्तनकारी अनुभव

    नेहा धूपिया ने इस प्रोजेक्ट को अपने करियर के सबसे मार्मिक और परिवर्तनकारी अनुभवों में से एक बताया। उनके मुताबिक, इस कहानी में मां की शांत शक्ति सबसे ज्यादा प्रभावशाली है-एक ऐसा किरदार जो बिना शोर किए अपने बेटे की दुनिया को आकार देता है। इस भूमिका को निभाने के लिए उन्हें भावनात्मक रूप से काफी गहराई में उतरना पड़ा, जो उनके लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ बेहद संतोषजनक भी रहा।

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    ग्लैमर से दूर,सादगी में मिली ताकत

    नेहा ने बताया कि इस किरदार का ग्लैमर-रहित रूप उनके लिए एक तरह की आजादी लेकर आया। उन्होंने इसे एक ऐसा अनुभव बताया, जिसमें उन्होंने दिखावे की परतों को हटाकर किरदार की असली संवेदनाओं को जिया-उसकी खामोशी, मजबूती और निस्वार्थ प्रेम को महसूस किया। उनके मुताबिक, ऐसे किरदार निभाना बेहद सशक्त होता है, जो अपनी कमजोरी में ही ताकत खोजते हैं।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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