अगले जन्म में फिर आपका बेटा बनूंगा...NEET री-एग्जाम देने वाले छात्रे ने सुसाइड किया, वीडियो में मांगी माफी

महाराष्ट्र के हिंगोली जिले से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। यहां 18 वर्षीय छात्र सुशील धागे ने कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उसने अपनी मां के लिए एक भावुक वीडियो रिकॉर्ड किया और परिवार को भेज दिया। वीडियो में सुशील ने मराठी भाषा में कहा, मम्मी मुझे माफ कर देना, मेरी चिंता मत करना।
उन्होंने आगे कहा कि मैं अगले जन्म में भी आपकी ही कोख से जन्म लूंगा। भाई के साथ अच्छे से रहना, मैं आत्महत्या कर रहा हूं। वीडियो देखकर परिवार के होश उड़ गए और उन्होंने उसकी तलाश शुरू कर दी, लेकिन अगले दिन उसकी लाश एक कुएं से बरामद हुई।
10वीं में 92% अंक, डॉक्टर बनने का था सपना
हिंगोली शहर के अष्टविनायक नगर निवासी सुशील पढ़ाई में काफी होनहार था। उसने 10वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
परिजनों के अनुसार, हाल ही में हुई री-NEET परीक्षा का पेपर उसे अपेक्षा से ज्यादा कठिन लगा था। इसी वजह से वह काफी तनाव में रहने लगा था। मंगलवार शाम वह घर से निकला और फिर वापस नहीं लौटा।
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छह महीने पहले पिता की मौत
सुशील के परिवार पर पहले से ही दुखों का पहाड़ टूटा हुआ था। करीब छह महीने पहले बीमारी के कारण उसके पिता विलास धागे का निधन हो गया था। पिता हमेशा उसकी पढ़ाई में सहयोग करते थे और उसे डॉक्टर बनते देखना चाहते थे।
पिता की मौत के बाद परिवार किसी तरह संभल रहा था, लेकिन अब बेटे की आत्महत्या ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। मां शीतल धागे का रो-रोकर बुरा हाल है।
कुएं में मिला शव, पुलिस कर रही जांच
परिवार की शिकायत और खोजबीन के बाद बुधवार सुबह सूचना मिली कि अष्टविनायक नगर के एक कुएं में एक युवक का शव मिला है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया और पहचान सुशील धागे के रूप में हुई। प्राथमिक जांच में आत्महत्या की बात सामने आई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
21 जून को हुई थी NEET री- एग्जाम
इस वर्ष NEET परीक्षा को लेकर पहले पेपर लीक का विवाद सामने आया था। इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की थी। 21 जून को हुई री-NEET परीक्षा में 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। कई छात्रों का कहना था कि दोबारा आयोजित परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले की तुलना में अधिक कठिन था। परिजनों का दावा है कि इसी तनाव और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता ने सुशील को मानसिक रूप से परेशान कर दिया था। यह घटना एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।











