एनसीडब्ल्यू की पहल:'तेरे-मेरे सपने' पहल से जुड़ेंगी मैट्रिमोनियल साइट्स, प्री मैरिटल कम्युनिकेशन जरूरी?

पल्लवी वाघेला, भोपाल। राष्ट्रीय महिला आयोग ने 'तेरे-मेरे सपने' पहल को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म की साझेदारी की दिशा में काम शुरू कर दिया है। पहले चरण में 12 मैट्रिमोनियल साइट्स ने इस पहल से जुड़ने की मंजूरी दी है। आयोग का उद्देश्य विवाह पूर्व संवाद और समझ की संस्कृति को मजबूत करना है।
मैट्रिमोनियल साइट्स को जोड़ने की तैयारी
एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने मैट्रिमोनियल वेबसाइट और मैरिज ब्यूरो प्रतिनिधियों के साथ परामर्श बैठक आयोजित की। बैठक के बाद इस प्लानिंग को आकार देने का काम शुरू हो गया है। पहले चरण में देश भर में कार्यरत 12 मैट्रिमोनियल साइट्स ने पहल से जुड़ने के लिए मंजूरी दी है। अगले चरण में प्रदेश स्तर पर कार्यरत स्थानीय मैरिज ब्यूरो को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
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'तेरे-मेरे सपने' पहल का उद्देश्य
राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा विवाह से पहले युवाओं को मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार करने के लिए 'तेरे-मेरे सपने' नाम से पहल शुरू की गई है। इस योजना के तहत मध्यप्रदेश सहित देश के 14 राज्यों में 105 प्री-मैरिटल काउंसलिंग सेंटर खोले गए हैं। बाकी राज्यों में भी इसके लिए प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। यहां आयोग से प्रशिक्षण प्राप्त विशेषज्ञ भावी कपल्स को विवाह पूर्व संवाद और समझ के लिए तैयार करेंगे।
युवाओं को काउंसलिंग के लिए करेंगे प्रेरित
आयोग का लक्ष्य है कि युवा जब मैट्रिमोनियल साइट्स के जरिए अपना जीवनसाथी तलाशें तो यह प्रक्रिया केवल शादी के इवेंट या प्री-वेडिंग शूट जैसे दिखावे तक सीमित न हो। आयोग ने अपने 7वें प्रशिक्षण कार्यक्रम में इन साइट्स के प्रतिनिधियों को शामिल किया। ताकि वे अपने प्लेटफॉर्म पर आने वाले युवाओं को प्री-मैरिटल काउंसलिंग के लिए प्रेरित कर सकें।
मजबूत रिश्तों की नींव पर रहेगा फोकस
इन साइट्स पर युवाओं की सहमति के बाद आयोग द्वारा प्रशिक्षित विशेषज्ञ उन्हें शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार करेंगे। साथ ही उनके बीच संवाद, समझ और सम्मान की नींव कितनी मजबूत है इसका आकलन भी किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि भावी रिश्ता मजबूत हो और परिवारों को टूटने से बचाया जा सके। विवाह पूर्व अपेक्षाओं की स्पष्टता और जिम्मेदारियों पर चर्चा को बढ़ावा दिया जाएगा।
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इन महत्वपूर्ण विषयों पर होगी चर्चा
प्री-मैरिटल काउंसलिंग के दौरान भावी जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर दोनों की सोच, व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान, बिना जज किए किसी भी विषय पर बात करने की सहजता, एक-दूसरे के लक्ष्य और सपनों को लेकर विचार और शारीरिक निकटता और आर्थिक व्यवस्था में दोनों की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। आयोग का मानना है कि ऐसे संवाद वैवाहिक संबंधों को अधिक मजबूत, संतुलित और दीर्घकालिक बना सकते हैं।












