आपातकाल की दर्दनाक दास्तां:जयश्री बनर्जी बोलीं-परिवार के 6 लोग थे जेल में, 300 से ज्यादा पत्रकारों को भेजा गया जेल

राजीव सोनी, भोपाल। आपातकाल की बरसी के संदर्भ में 'पीपुल्स समाचार' से विशेष चर्चा में लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद कैलाश सोनी और जबलपुर से सांसद रहीं जयश्री बनर्जी ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि 25 जून 1975 से 20-21 महीने तक देश में तानाशाही का शासन रहा। लोकतंत्र बचा नहीं था और नागरिकों की आजादी छिन चुकी थी। हर व्यक्ति दहशत में जी रहा था। जेलों में मिली प्रताड़ना के चलते मीसाबंदी जेल से छूटने के बाद भी मानसिक रूप से बीमार हो गए थे। पूर्व सांसद बनर्जी बताती हैं कि उनके पति को अंबिकापुर जेल में जहरीला पानी दिया गया। जेल से छूटने के बाद बीमारियों ने घेर लिया। उन्हें दिल का दौरा पड़ गया था। लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष सोनी से हुई चर्चा के प्रमुख अंश...
मध्यप्रदेश में अभी 1200 मीसाबंदी जीवित, 300 से ज्यादा पत्रकार भी थे जेल में...
सवाल: आपातकाल के दौरान महिला नेत्रियों की क्या स्थिति थी?
जवाब: देश की कई महिला नेत्रियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। मध्यप्रदेश से 8-10 महिलाएं थीं। राजमाता सिंधिया और जयश्री बनर्जी भी इनमें शामिल रहीं। इन्हें भी जेल में यातनाएं दी गईं।
सवाल: उस दौरान सरकार के खिलाफ लिखने वाले अखबार और पत्रकारों के साथ कैसा बर्ताव हुआ?
जवाब: अखबारों पर सेंसरशिप लागू हो गई थी। देश में 300 से अधिक पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया था। इनमें 33 तो विदेशी पत्रकार भी थे।
सवाल: जेलों में कितने मीसाबंदी थे। एमपी के कितने लोग थे, अब कितने बचे हैं?
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जवाब: देखिए, देश में कुल 1 लाख 8 हजार थे। मध्यप्रदेश के 8500 आरएसएस और जनसंघ के कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए थे। इनमें अब 1200 ही बचे हैं।
सवाल: मीसाबंदियों को देश के कितने राज्य सम्मान निधि दे रहे हैं?
जवाब: मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार और ओडिशा सहित देश में 12 राज्य हैं। ओडिशा में 4 महीने पहले शुरू हुई है। एमपी सरकार 6 महीने से ज्यादा जेल में रहने वालों को 30 हजार रुपए सम्मान निधि देती है।
सवाल: आपातकाल को 51 साल हो चुके हैं। अब लोकतंत्र सेनानी संघ की भविष्य को लेकर क्या प्लानिंग है?
जवाब: केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार से भी हमारी चर्चा हुई है। लोक नायक जयप्रकाश नारायण की जीवनी और आपातकाल के कालखंड को स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करने का विचार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा हुई है। 26 जून को सीएम की अध्यक्षता में बड़ा कार्यक्रम भी है।












