MP News :MSME में बढ़ रहा NPA का बोझ, 2 साल में लोन 36% बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

मध्यप्रदेश में बैंकिंग क्षेत्र में ऋण वितरण लगातार बढ़ रहा है, लेकिन गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) का बढ़ता ग्राफ चिंता का विषय बना हुआ है। प्रदेश में मार्च 2026 तक एमएसएमई क्षेत्र का कुल बकाया ऋण 1.45 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। इससे स्पष्ट है कि छोटे उद्योगों की विस्तार क्षमता तो बढ़ रही है, लेकिन वित्तीय अनुशासन और ऋण अदायगी अभी भी बड़ी चुनौती है।
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MSME में बढ़ रहा NPA का बोझ, 2 साल में लोन 36% बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
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अशोक गौतम, भोपाल। मप्र में MSME क्षेत्र में NPA बढ़ने का खुलासा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की बैठक में हुआ है। मप्र में 25 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं। इससे पता चलता है कि मध्यम एवं छोटे उद्योगों में ऋण अदायगी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मार्च 2024 में एमएसएमई क्षेत्र का एनपीए 6,174 करोड़ रुपए था, जो मार्च 2026 में यह बढ़कर 6,366 करोड़ रुपए हो गया।

NPA में वृद्धि से बढ़ रही चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, बाजार में प्रतिस्पर्धा, भुगतान में देरी और सीमित कार्यशील पूंजी के कारण कई छोटे उद्योग समय पर ऋण चुकाने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। मप्र में इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, पीथमपुर, मालनपुर और मंडीदीप जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में हजारों एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों को रोजगार सृजन का प्रमुख आधार माना जाता है। ऐसे में एनपीए में वृद्धि बैंकिंग क्षेत्र और उद्योग जगत, दोनों के लिए चिंता का विषय बन रही है।

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सबसे बड़ी चिंता कृषि क्षेत्र को लेकर  

  • कृषि क्षेत्र का NPA मार्च 2024 में 19,764 करोड़ रुपए से बढ़कर मार्च 2026 में 22,215 करोड़ रुपए हो गया।
  • फसल ऋण (क्रॉप लोन) का NPA 14,621 करोड़ रुपए से बढ़कर 17,128 करोड़ रुपए हुआ।
  • बैंकिंग आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में मार्च 2024 में प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र का कुल ऋण बकाया 1,06,612 करोड़ रुपए था, जो मार्च 2026 तक 1,45,491 करोड़ रुपए पहुंच गया।

प्रमुख आंकड़े (मार्च 2026)

  • कुल NPA              36,654
  • कृषि NPA             22,215
  • फसल ऋण NPA    17,128
  • एमएसएमई NPA    6,366
  • कुल अग्रिम             6,65,941

           (राशि करोड़ में)

 कुल ऋण वितरण में दो वर्षों में 25 प्रतिशत  से अधिक वृद्धि

  •  कृषि क्षेत्र का NPA सबसे अधिक
  • अन्य प्राथमिकता क्षेत्र में NPA में कमी 
  • बैंकिंग क्षेत्र के लिए कृषि ऋण की वसूली सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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लागत की तुलना में फसल की कीमत नहीं बढ़ रही

कृषि उत्पादन घटता जा रहा है। किसानों की मजदूरी भी इससे निकलना मुश्किल होता है। बिना खाद के फसल की पैदावार नहीं होती है। जिस तरह से खाद, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, उसके अनुसार फसल की कीमत नहीं बढ़ती है। सरकार से जो सहायता मिलती है वह काफी नहीं है।

प्रभात पांडे,  किसान, डभौरा तहसील, जिला रीवा

उद्योगों में सही प्लानिंग नहीं होने का नतीजा

MSME का NPA होना उद्योगों के प्लानिंग की कमी है। सरकार की तरफ से भरपूर सहयोग मिल मिल रहा है। उद्योगों का ओवर एक्सपांशन करने और मांग और जरूरतों के अनुसार उद्योगों को अपग्रेड नहीं करने पर NPA की समस्या आती है। कई बार उद्योग गलत रेट कोड कर देते हैं तो फिजिवल नहीं है।

विजय गौड़, अध्यक्ष, मप्र गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन 

केंद्र सरकार स्कीम तैयार कर रही है

बीमारू MSME को बेहतर स्थिति में लाने के लिए केंद्र सरकार कुछ स्कीम तैयार कर रही है। इससे MSME को बढ़ावा देने, उनके उत्पादों को बाजार तथा उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए सहायता दी जाएगी और बाजार तथा पहचान उपलब्ध कराने में मदद की जाएगी।

चैतन्य काश्यप, मंत्री MSME

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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