पिछले महीने 25 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ चैप्टर वाली NCERT की किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। NCERT के सूत्रों ने इसकी पुष्टि भी की थी। बता दें NCERT ने यह मुद्दा सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने यह मुद्दा कोर्ट के सामने उठाया। सिब्बल ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच से कहा कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है, जो निंदनीय है। वहीं सिंघवी ने कहा कि ऐसा दिखाया गया है मानो भ्रष्टाचार केवल न्यायपालिका में ही है, जबकि राजनीति और ब्यूरोक्रेसी में इसका जिक्र नहीं किया गया।
अधिकारियों की इंटरनल मीटिंग हुई
विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने इस चैप्टर का सुझाव देने वाले एक्सपर्ट्स और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की इंटरनल मीटिंग बुलाई। इसके साथ ही विवादित किताब को NCERT की आधिकारिक वेबसाइट से भी हटा लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, मामले की समीक्षा के बाद किताब की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई।
2026-27 सत्र के लिए जारी हुई थी किताब
NCERT ने 23 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक जारी की थी। यह किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी। किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट-2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ नाम का टॉपिक जोड़ा गया था, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया।











