NCERT की 9वीं की नई किताब में बड़ा बदलाव :संविधान की प्रस्तावना हटाई; इमरजेंसी पर जोड़ा नया अध्याय

नई किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों जैसे फेक न्यूज, गलत सूचना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव, गरीबी और लैंगिक असमानता पर भी चर्चा की गई है।
संविधान की प्रस्तावना हटाई; इमरजेंसी पर जोड़ा नया अध्याय

NCERT ने कक्षा 9वीं की सोशल साइंस की नई किताब में कई अहम बदलाव किए हैं। नई पुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' में संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को शामिल नहीं किया गया है। इसके साथ ही प्रस्तावना में मौजूद 'सोशलिस्ट' (समाजवादी) और 'सेक्युलर' (धर्मनिरपेक्ष) जैसे शब्दों का भी उल्लेख नहीं है। हालांकि किताब में संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों पर विस्तार से जानकारी दी गई है।

इमरजेंसी पर जोड़ा गया नया सेक्शन

नई किताब में 1975 की इमरजेंसी को लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। इसमें लिखा गया है कि जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया था। इस दौरान कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। किताब के मुताबिक, इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और नागरिकों की स्वतंत्रता सीमित हो गई।

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जयप्रकाश नारायण आंदोलन का भी हुआ जिक्र

पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया, जिससे बिहार और गुजरात में बड़े जन आंदोलन हुए। किताब में यह भी बताया गया है कि 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद हुए चुनाव में जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और तत्कालीन सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।

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लोकतंत्र की नई चुनौतियों पर फोकस- NCERT

नई किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों जैसे फेक न्यूज, गलत सूचना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव, गरीबी और लैंगिक असमानता पर भी चर्चा की गई है। पहली बार 'डेमोक्रेसी एंड यू' नाम से नया सेक्शन जोड़ा गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भूमिका समझाना है।

चुनाव आयोग और मीडिया की भूमिका भी बताई

पुस्तक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा गया है कि 2024 में 96.8 करोड़ से अधिक मतदाताओं के बावजूद निष्पक्ष चुनाव कराना दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में से एक है। साथ ही मीडिया को लोकतंत्र का 'चौथा स्तंभ' बताते हुए उसकी जिम्मेदारी और महत्व भी समझाया गया है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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