NEET रिजल्ट के बाद कॉलेज चुनने की टेंशन! छात्रों की मजबूरी बनी निजी काउंसलिंग एजेंसियों की कमाई, 50 हजार तक बिक रहे पैकेज

भोपाल। NEET UG का परिणाम आने के बाद अब मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। रजिस्ट्रेशन के बीच छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनकी रैंक और नंबर के हिसाब से कौन सा कॉलेज मिल सकता है। इसी उलझन के बीच निजी काउंसलिंग एजेंसियों का बाजार भी तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। पड़ताल में सामने आया कि कई एजेंसियां फोन, ऑनलाइन बातचीत और व्यक्तिगत मुलाकात के जरिए छात्रों को अलग-अलग पैकेज दे रही हैं। इन सेवाओं के बदले करीब 30 हजार से 50 हजार रुपये तक फीस मांगी जा रही है। एजेंसियां कॉलेज चयन से लेकर चॉइस फिलिंग तक मदद का दावा कर रही हैं।
रैंक के हिसाब से कॉलेज बताने का दावा
NEET में नंबर आने के बाद छात्र के सामने सरकारी, निजी, राज्य कोटा और ऑल इंडिया कोटा के विकल्प होते हैं। हर कॉलेज की फीस और पिछले साल की कटऑफ अलग होती है। ऐसे में छात्रों को यह समझना मुश्किल हो जाता है कि उन्हें कौन सा विकल्प पहले रखना चाहिए। निजी एजेंसियां इसी परेशानी को अपनी सेवा का आधार बना रही हैं। उनका दावा है कि छात्र की रैंक, अंक और कैटेगरी देखकर संभावित कॉलेजों की सूची तैयार की जाएगी।
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30 से 50 हजार तक के पैकेज
कई निजी एजेंसियां काउंसलिंग के लिए अलग-अलग पैकेज दे रही हैं। इनकी फीस करीब 30 हजार रुपये से शुरू होकर 50 हजार रुपये तक बताई जा रही है। पैकेज में रजिस्ट्रेशन, दस्तावेजों की जानकारी, कॉलेज की सूची तैयार करना, चॉइस फिलिंग और चॉइस लॉक करने तक मदद देने की बात कही जा रही है। यानी सरकारी काउंसलिंग प्रक्रिया के साथ छात्रों के लिए निजी सलाह का भी एक अलग बाजार तैयार हो गया है।
चॉइस फिलिंग को बताया सबसे अहम
काउंसलिंग में कॉलेज की प्राथमिकता तय करना छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण चरण होता है। इसी को लेकर एजेंसियां छात्रों को सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं। उनका कहना है कि गलत क्रम में कॉलेज चुनने से पसंद का विकल्प मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से रैंक के आधार पर चॉइस फिलिंग तैयार करने और पूरी प्रक्रिया में साथ रहने के नाम पर फीस ली जा रही है।
अभिभावकों की चिंता बनी कमाई का जरिया
बच्चे की रैंक आने के बाद अभिभावक कटऑफ, सीट, कॉलेज की फीस और प्रवेश की संभावना जैसी कई जानकारियां जुटाते हैं। अलग-अलग नियम और विकल्प होने के कारण कई परिवारों को फैसला लेना मुश्किल लगता है। निजी एजेंसियां इसी चिंता को समझकर उन्हें पैकेज दे रही हैं। कॉलेज मिलने की गारंटी और केवल सलाह देने के बीच अंतर समझना जरूरी है।
दो छात्रों ने साझा किया अनुभव
इंदौर की सौम्या सक्सेना ने NEET में 458 अंक आने के बाद एक निजी एजेंसी से संपर्क किया। उनके मुताबिक एजेंसी ने पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया संभालने के लिए 50 हजार रुपये का पैकेज बताया था। बातचीत के बाद यह रकम 35 हजार रुपये में तय हुई। वहीं भोपाल के रोहित श्रेष्ठ ने बताया कि रिजल्ट के बाद उन्होंने एक एजेंसी से संपर्क किया। उनसे 40 हजार रुपये मांगे गए थे, लेकिन बाद में 10 हजार रुपये कम में बात तय हुई। रोहित के अनुसार, एजेंसी ने काउंसलिंग पूरी होने तक प्रक्रिया संभालने की बात कही।
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एक्सपर्ट बोले, कटऑफ से गारंटी नहीं
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राकेश मालवीय का कहना है कि रैंक और पिछले वर्षों की कटऑफ के आधार पर कॉलेज की संभावना का अनुमान लगाया जा सकता है लेकिन किसी सीट की पक्की गारंटी नहीं दी जा सकती। हर साल रैंक, सीट और कटऑफ में बदलाव हो सकता है। इसलिए छात्रों को किसी भी एजेंसी की फीस, पैकेज और शर्तों को अच्छी तरह समझने के बाद ही फैसला लेना चाहिए। साथ ही सरकारी काउंसलिंग की आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है।











