1.27 लाख केस, 79 हजार मौतें:90% कैंसर का खतरा रोकती है HPV वैक्सीन, फिर भी झिझक क्यों ?

हर लड़की और महिला की जिंदगी में सेहत सबसे बड़ा खजाना होती है। लेकिन जब बात महिलाओं की प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) की आती है, तो समाज में अब भी झिझक और चुप्पी की एक दीवार खड़ी दिखाई देती है।
यही एक गंभीर बीमारी सर्वाइकल कैंसर जन्म देती है, जो धीरे-धीरे शरीर में पनपती है और कई बार तब तक पता ही नहीं चलती जब तक यह खतरनाक रूप न ले ले। लेकिन राहत की बात यह है कि आज चिकित्सा विज्ञान के पास इससे बचाव का एक मजबूत उपाय मौजूद है- HPV वैक्सीन।
यह भी पढ़ें: HPV वैक्सिनेशन अभियान : पिछड़ रहे बड़े शहर, इंदौर में 3 फीसदी तो भोपाल में 6 फीसदी लगे टीके
HPV क्या है और यह कैसे फैलता है?
HPV (Human Papillomavirus) एक सामान्य लेकिन कई बार खतरनाक वायरस होता है। इसके 100 से ज्यादा प्रकार पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ प्रकार शरीर में संक्रमण पैदा कर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक HPV के कुछ हाई-रिस्क प्रकार गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में बदलाव कर देते हैं। यही बदलाव धीरे-धीरे सर्वाइकल कैंसर का रूप ले सकते हैं।
यह भी पढ़ें: MP News: जबलपुर में CM यादव का बड़ा ऐलान, बेटियों को मुफ्त रहेगी HPV वैक्सीन
अक्सर इस वायरस का संक्रमण शुरुआती चरण में बिना किसी लक्षण के होता है, इसलिए कई महिलाएं इसके बारे में समय रहते जान भी नहीं पातीं। यही वजह है कि डॉक्टर टीकाकरण को सबसे प्रभावी बचाव मानते हैं।
सर्वाइकल कैंसर क्या है?
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के गर्भाशय के निचले हिस्से यानी गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में होने वाला कैंसर है। यह आमतौर पर लंबे समय तक HPV संक्रमण बने रहने के कारण विकसित होता है। दुनिया भर में यह महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है। भारत में इसकी स्थिति और भी गंभीर है।
भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति
भारत में हर साल लगभग 1.2 से 1.27 लाख नए मामले सामने आते हैं। हर साल 67 हजार से 79 हजार महिलाओं की मौत इस बीमारी से हो जाती है। वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों में करीब 25% मौतें भारत में होती हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि अगर समय पर रोकथाम न की जाए तो यह बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है।
HPV वैक्सीन क्या है?
HPV वैक्सीन एक विशेष टीका है जो शरीर को ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के खिलाफ सुरक्षा देता है। जब यह वैक्सीन शरीर में दी जाती है तो यह प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर देती है। शरीर वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देता है। बाद में यदि असली वायरस शरीर में प्रवेश करने की कोशिश करता है तो ये एंटीबॉडी उसे तुरंत खत्म कर देती हैं। यानी यह वैक्सीन संक्रमण होने से पहले ही शरीर को तैयार कर देती है।
HPV वैक्सीन क्यों जरूरी है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह वैक्सीन महिलाओं के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। इसके कई महत्वपूर्ण फायदे हैं:
- सर्वाइकल कैंसर के 90% तक मामलों को रोकने में मदद करती है।
- जननांगों से जुड़े अन्य कैंसर से भी सुरक्षा देती है।
- HPV से होने वाले जननांग मस्सों (Genital Warts) को रोकती है।
- भविष्य में कैंसर के खतरे को कम कर मानसिक तनाव भी घटाती है।
- डॉक्टर कम उम्र में टीकाकरण को सबसे प्रभावी मानते हैं।
किस उम्र में लगवानी चाहिए HPV वैक्सीन?
विशेषज्ञों के अनुसार HPV वैक्सीन 9 से 14 साल की उम्र में लगवाना सबसे ज्यादा प्रभावी होता है। इस उम्र में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत मजबूत प्रतिक्रिया देती है, जिससे वैक्सीन लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है।
हालांकि अगर किसी कारण से इस उम्र में टीकाकरण नहीं हो पाया है, तो 15 से 26 वर्ष तक की युवतियां भी डॉक्टर की सलाह से यह वैक्सीन लगवा सकती हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर 45 वर्ष तक की उम्र में भी इसे लगाने की सलाह देते हैं।
कितने डोज लगते हैं और कितना होता है गैप?
HPV वैक्सीन की डोज उम्र के अनुसार अलग-अलग होती है।
9 से 14 वर्ष की उम्र में 2 डोज- पहली डोज के लगभग 6 महीने बाद दूसरी डोज
15 वर्ष या उससे अधिक उम्र में 3 डोज- पहली डोज और फिर दूसरी डोज 1 से 2 महीने बाद और तीसरी डोज 6 महीने बाद। डॉक्टर बताते हैं कि पूरा कोर्स पूरा करना जरूरी है, तभी वैक्सीन का पूरा फायदा मिलता है।
क्या पुरुषों के लिए भी जरूरी है यह वैक्सीन?
अक्सर यह माना जाता है कि HPV वैक्सीन सिर्फ महिलाओं के लिए है, लेकिन ऐसा नहीं है। पुरुषों में भी HPV संक्रमण से गले, एनल और जननांग कैंसर हो सकते हैं।
इसलिए 9 से 26 वर्ष की उम्र के लड़कों को भी यह वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जाती है। इससे संक्रमण का फैलाव भी कम होता है और समाज में समग्र सुरक्षा बढ़ती है।











