'तमिलनाडु CM विजय ने राहुल गांधी को PM कैंडिडेट चुना', कांग्रेस नेता के दावे से सियासी हलचल तेज

तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। तमिलनाडु विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की नेता थराहाई कथबर्ट ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री विजय ने गठबंधन की ओर से राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुना है। कथबर्ट ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब सत्तारूढ़ दल और उसके गठबंधन सहयोगियों के बीच नेतृत्व को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
राहुल गांधी को चुना उम्मीदवार- कांग्रेस नेता
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में थराहाई कथबर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार माना है। उन्होंने दावा किया कि विजय इसी राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और गठबंधन की आगे की रणनीति भी इसी सोच के आधार पर तय की जा रही है। कथबर्ट ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि तमिलनाडु में विजय का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सामने आना पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक राय नहीं है। उनके मुताबिक, स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की ओर से विजय का नाम उत्साह में लिया जा रहा है।
राहुल गांधी को लेकर BJP पर साधा निशाना
उत्तराखंड के हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ हाल में दर्ज हुई एफआईआर पर भी थराहाई कथबर्ट ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बीजेपी की राजनीतिक चिंता से जोड़ते हुए कहा कि राहुल गांधी को मिल रहे जनसमर्थन से बीजेपी परेशान है। कथबर्ट ने दावा किया कि राहुल गांधी 2029 में देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। हालांकि, यह उनका राजनीतिक दावा है और इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक चुनावी घोषणा सामने नहीं आई है।
विधानसभा में सीट बदलने पर भी दी सफाई
तमिलनाडु विधानसभा में अपनी सीट बदले जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर भी कथबर्ट ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि सीट बदलना किसी राजनीतिक रणनीति या अंदरूनी खींचतान का हिस्सा नहीं है, बल्कि विधानसभा की सामान्य प्रक्रिया के तहत हुआ है। उन्होंने बताया कि 13 अगस्त को उन्हें तमिलनाडु विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया था। इसके बाद फ्लोर लीडर की जिम्मेदारी मिलने के कारण 31 अगस्त को उन्हें विधानसभा में आगे की पंक्ति में सीट दी गई।
फ्रंट रो की सीट को लेकर क्या बोलीं कथबर्ट?
कथबर्ट के मुताबिक, विधानसभा में आगे की पंक्ति की सीट आमतौर पर विपक्षी दलों के नेताओं को दी जाती है। कांग्रेस विधायक दल की नेता बनने के बाद उन्हें भी इसी प्रक्रिया के तहत फ्रंट रो में जगह मिली है। उन्होंने साफ कहा कि सीट बदलने के पीछे कोई राजनीतिक विवाद, दबाव या रणनीति नहीं है। यह विधानसभा में उनकी नई जिम्मेदारी के अनुसार किया गया सामान्य बदलाव है।




















