संसद में ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल पास, छात्रों के प्रदर्शन पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 पारित कर दिया गया। सदन में लगातार नारेबाजी और व्यवधान के बीच सरकार ने इस बिल को ट्रिब्यूनल व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम बताया है। सरकार का कहना है कि नए कानून से ट्रिब्यूनल्स के कामकाज को ज्यादा प्रभावी और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
ट्रिब्यूनल्स में क्या बदलने की तैयारी?
ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग ट्रिब्यूनल्स के कामकाज में एकरूपता लाना है। इसके तहत ट्रिब्यूनल्स के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति, योग्यता और सेवा शर्तों से जुड़े नियमों को ज्यादा स्पष्ट और समान बनाने का प्रस्ताव है। सरकार के मुताबिक, इससे नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और ट्रिब्यूनल्स के काम करने का तरीका ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगा।
मामलों का जल्द निपटारा करने पर जोर
सरकार का कहना है कि ट्रिब्यूनल्स में मामलों के निपटारे में होने वाली देरी को कम करना भी इस सुधार का एक अहम उद्देश्य है। ट्रिब्यूनल्स को ज्यादा स्वतंत्र और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि लोगों और संस्थानों से जुड़े मामलों का फैसला समय पर हो सके। सरकार का दावा है कि इससे इन संस्थाओं की कार्यक्षमता बेहतर होगी।
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लोकसभा में और भी बिल पेश
ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल के अलावा सोमवार को लोकसभा में कई दूसरे महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किए गए। इनमें माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026, केरल (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल, 2026 और नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026 शामिल हैं। सरकार मानसून सत्र के दौरान अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है, लेकिन दूसरी ओर विपक्ष लगातार कई मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है।
छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा गरमाया
इस बीच छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा भी संसद में बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्ष इस मामले पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है। यही मुद्दा मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की बड़ी वजह बनता दिख रहा है। विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई है।
किरेन रिजिजू ने विपक्ष से की चर्चा की अपील
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी सांसदों से सदन की चर्चा में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। रिजिजू ने विपक्ष से कहा कि वह चर्चा के बीच से 'भागे नहीं' और पूरी बहस को सुने। उनका कहना था कि सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है, इसलिए विपक्ष को भी चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।
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आगे भी जारी रह सकता है गतिरोध
छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से सवाल पूछ रहा है। विपक्ष का कहना है कि पुलिस कार्रवाई और पेलेट गन के कथित इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर संसद में सरकार को जवाब देना चाहिए। वहीं, सरकार का कहना है कि वह विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। लेकिन चर्चा के तरीके को लेकर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसे में मानसून सत्र में एक तरफ सरकार अपने विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने में जुटी है, तो दूसरी ओर छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बना हुआ है। आने वाले दिनों में भी इस मामले को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और हंगामे के आसार बने रह सकते हैं।












